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ब्लैक कैट कमांडो को जाना होगा जेल: ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहा... सेना के कमांडो की अपील खारीज

Tue, 24 Jun 2025 08:36 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

भारतीय सेना के ब्लैक कैट कमांडो को जेल जाना होगा। सेना की राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात कमांडो बलजिंद सिंह ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया है।
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Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब के अमृतसर निवासी बलजिंदर सिंह की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। बलजिंदर सिंह भारतीय सेना में तैनात है और वह ऑपरेशन सिंदूर में भी शामिल था। लेकिन उसे अब जेल जाना पड़ेगा। क्योंकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। 

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करीब 21 साल पहले पत्नी की हत्या के आरोप में सजा याफ्ता राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात ब्लैक कैट कमांडो बलजिंदर सिंह की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उसको आत्मसमर्पण से छूट दिए जाने से मना कर दिया है। इससे पहले दोषी बलजिंदर सिंह की याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी रद्द किया जा चुका है। आरोपी बलजिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि वह पिछले 20 वर्षों से राष्ट्रीय राइफल्स में ब्लैक कैट कमांडो है। वह ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहा है, इसलिए उसे विशेष रियायत दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस उज्जल भुयान और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने इस अपील को खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि यह कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि एक गंभीर और अमानवीय हत्या का मामला है। इसलिए कोई राहत नहीं दी जा सकती। जस्टिस उज्जल भुयान ने कहा कि अगर राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात है तो इससे आपको घरेलू अत्याचार करने की छूट नहीं मिल जाती। यह तो दिखता है कि आरोपी शारीरिक रूप से कितना सक्षम था और किस तरह से पत्नी की गला घोंट कर हत्या की।
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यह है पूरा मामला
आरोपी बलजिंदर सिंह की शादी 2002 में शादी हुई थी। 18 जुलाई 2004 को बलजिंदर सिंह की पत्नी की हत्या हो गई। इस मामले में मृतका के भाई और भाभी ने अदालत में गवाही दी थी कि जब वे सुबह नौ बजे उसकी ससुराल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बलजिंदर और उसके पिता मिलकर उसकी पत्नी का गला चुन्नी से घोंट रहे थे, जबकि सास और ननदें उसके हाथ-पैर पकड़े हुए थीं। जांच में आया था कि मृतका की मौके पर मौत हो गई। सुनवाई में चार सह-आरोपियों को बरी कर दिया गया, बलजिंदर को दोषी ठहराया गया। हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक उसकी सजा पर रोक लगा दी, जिसके चलते वह करीब 17 साल से जेल से बाहर था। मई 2025 में हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला देते हुए उसकी अपील खारिज कर दी और सजा बहाल रखी।
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