चंडीगढ़ अक्षय ऊर्जा एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (क्रेस्ट) के 75 करोड़ रुपये से अधिक के फंड गबन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के वरिष्ठ अधिकारी और क्रेस्ट के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नवनीत श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया है।
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि कथित गबन की रकम का एक हिस्सा ऐसी निजी कंपनी के खाते में पहुंचा, जिसमें नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार निदेशक के रूप में जुड़े हुए हैं। एजेंसी अब इस कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित तौर पर इस धनराशि का उपयोग प्रॉपर्टी खरीदने, लग्जरी वाहन लेने और अन्य निवेशों में किया गया। हालांकि एजेंसी अभी इन पहलुओं की पुष्टि के लिए दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रही है।
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार क्रेस्ट के बैंक खातों से कुल 303 संदिग्ध लेन-देन किए गए। इन ट्रांजेक्शनों के माध्यम से लगभग 75.34 करोड़ रुपये चार अलग-अलग शेल कंपनियों के खातों में भेजे गए। जांच में यह भी सामने आया कि संस्था को मूल राशि के अलावा ब्याज के रूप में भी करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। एजेंसी का मानना है कि सरकारी धन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से फर्जी कंपनियों और बेनामी संस्थाओं का सहारा लिया गया।
इस मामले में इससे पहले क्रेस्ट के तत्कालीन परियोजना निदेशक सुखविंदर सिंह अबरोल और तत्कालीन अकाउंटेंट साहिल कुक्कड़ को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई का मानना है कि घोटाले में कई स्तरों पर मिलीभगत हुई और बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर सरकारी धन को बाहर निकाला गया।
हाल ही में सीबीआई ने इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें निजी बैंक के पांच अधिकारी, क्रेस्ट और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े दो सरकारी कर्मचारी, दो शेल कंपनियां, तीन साझेदार या निदेशक और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार यह मामला केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी धन के सुनियोजित दुरुपयोग का मामला है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फंड ट्रांसफर की मंजूरी किन स्तरों पर दी गई, किसे कितना लाभ पहुंचा और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
नवनीत श्रीवास्तव – तत्कालीन सीईओ, क्रेस्ट