आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और गीत में इस्तेमाल किए गए शब्द महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी माताओं और बेटियों की इज्जत पर कीचड़ उछालने जैसा है, इसलिए किसी भी कीमत पर इसे बख्शा नहीं जाएगा।
टटीरी गाने के विवाद में फंसे गायक आदित्य सिसोदिया उर्फ बादशाह शुक्रवार को पानीपत में राज्य महिला आयोग की सुनवाई में पेश नहीं हुए। उनके अधिवक्ता ने कहा वह एक कार्यक्रम के लिए व्यस्त हैं और कुछ समय दिया जाए। इस पर आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने सख्त नाराजगी जाहिर की। साथ ही पानीपत, जींद और पंचकूला पुलिस से बादशाह को तुरंत गिरफ्तार करने और उनका पासपोर्ट जब्त करने को कहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र लिखकर पूरे देश में बादशाह के कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है।
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टटीरी गाने में अमर्यादित बोल पर रैपर बादशाह विवादों में फंसे हुए हैं। उन पर पहले ही प्राथमिकी दर्ज है। पानीपत निवासी नारी तू नारायणी संगठन की अध्यक्ष सविता आर्य ने उनके खिलाफ राज्य महिला आयोग में शिकायत दी थी जिसके बाद आयोग ने पंचकूला और जींद में बादशाह के खिलाफ शिकायत दी थी। साथ ही 13 मार्च को पानीपत जिला सचिवालय में होने वाली जनसुनवाई में पेश होकर अपना पक्ष रखने लिए समन जारी किया गया था। शुक्रवार को बादशाह को आयोग के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना था लेकिन वह नहीं आए। उनकी ओर से उनके अधिवक्ता अक्षय दहिया ने करीब 11 बजे आयोग के सामने पेश होकर कुछ समय दिए जाने की मांग की।
अधिवक्ता ने कहा कि बादशाह ने इसके लिए माफी मांग ली है। आयोग ने तीन बजे तक का समय दिया लेकिन तीन बजे तक चली सुनवाई के दौरान बादशाह नहीं आए। इसके बाद आयोग की अध्यक्ष रेणू भाटिया ने कहा कि यह बेटियों का अपमान है। पहले तो बेटियों के लिए गाने में अमर्यादित बोल प्रयोग किए गए और अब आयोग सामने पेश न होना बेटियों का अपमान है।
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आयोग बात सुनने को तैयार नहीं है: वकील
बादशाह के अधिवक्ता अक्षय दहिया ने कहा कि उन्हें कोई समन नहीं मिला है, फिर भी वह समय मांगने के लिए आए थे, लेकिन आयोग ने उनकी बात नहीं सुनी। बादशाह माफी मांग चुके हैं और गाने को भी हटा दिया गया है। इसके बावजूद भी आयोग उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। यह एक तरह की राजनीति के तहत किया जा रहा है।
क्या आयोग के कहने पर हो सकती है गिरफ्तारी?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज कुमार के मुताबिक आयोग सीधे तौर पर किसी को गिरफ्तार करने का आदेश जारी नहीं कर सकता है, गिरफ्तारी या किसी तरह की कार्रवाई के लिए आयोग सिफारिश कर सकता है। इसी तरह किसी का पासपोर्ट रद्द करने के लिए भी आयोग संबंधित पासपोर्ट ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सिफारिश कर सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 के तहत आयोग महिलाओं से जुड़े उत्पीड़न, हिंसा या भेदभाव की शिकायत लेकर उसकी जांच को लेकर पुलिस या प्रशासन से रिपोर्ट मांग सकता है। संबंधित व्यक्ति या अधिकारियों को आयोग के समक्ष बुलाने के लिए समन जारी कर सकता है। पुलिस या सरकार को कार्रवाई करने की सिफारिश कर सकता है। यदि अपराध बनता है तो एफआईआर दर्ज करने या जांच करने को कह सकता है। अंतिम फैसला पुलिस या अदालत का होता है।