पंजाब में लगातार गिर रहे भूजल से गंभीर हालात पैदा हो गए हैं। भूजल संकट ने केंद्र के साथ ही सूबा सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 118 ब्लॉक रेड जोन में पहुंच गए हैं और सूबा अभी भी भूजल निष्कर्षण में टॉप पर बना हुआ है।
हालांकि वर्ष 2023 के मुकाबले प्रदेश में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है। सरकार के प्रयासों से बलाचौर, फिरोजपुर, गुरु हर सहाय, मक्खू व श्री हरगोबिंदपुर में अच्छे परिणाम मिले हैं, जिसे राज्य सरकार की तरफ से अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। केंद्रीय भूजल बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड की तरफ से कुल 153 यूनिट्स में स्टडी की गई है, जिसमें 3 शहरी क्षेत्र भी शामिल थे। 115 यूनिट्स यानि 112 ब्लॉक व तीनों शहरी क्षेत्र अभी भी रेड जोन में बने हुए हैं, जो 75.16 प्रतिशत है। 4 ब्लॉक में हालात क्रिटिकल है, जबकि 12 ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में है। सिर्फ 22 ब्लॉक ही सेफ जोन में पाए गए हैं। अगर कुल क्षेत्र की बात की जाए तो 50175.27 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में से 35,786.32 स्क्वायर मीटर भूजल दोहन से बुरी तरह से प्रभावित है, जोकि 71.32 प्रतिशत है। जबकि सिर्फ 13 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र ही सेफ है, जो 17.87 प्रतिशत है।