पंजाब की सियासत में चर्चित नेता और दो बार सूबे के सीएम रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह पर फिर से कांग्रेस ने डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। कैप्टन के प्रति सहानुभूति कार्ड फेंकते हुए इस बार कांग्रेस में वापसी का ऑफर पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने दिया है जबकि पहले ये प्रस्ताव कांग्रेसी नेता सुखविंद्र सिंह रंधावा व प्रताप सिंह बाजवा भी दे चुके हैं।
उधर कैप्टन की बेटी व भाजपा की महिला विंग की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पिता कैप्टन अमरिंदर भाजपा में ही रहेंगे और कहीं नहीं जा रहे हैं। दरअसल, ये सियासी हलचल विगत दिवस कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक पुराने मामले में ईडी द्वारा जारी किए गए समन के बाद जारी हुआ है। राजीव गांधी के मित्र रहे कैप्टन अमरिंदर पहली बार 1980 में लोकसभा के सदस्य चयनित हुए थे।
पंजाब में दमदार लीड माने जाने वाले कैप्टन तीन बार पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष व दो बार मुख्यमंत्री बने। साल 2021 में कार्यकाल पूरा होने से पहले जब कैप्टन को सीएम पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को करीब छह माह का सीएम बनाया गया तो कैप्टन ने इसे अपनी तौहीन समझते हुए कांग्रेस को अलविदा कह दिया। नवंबर 2021 को कैप्टन अपनी नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई और सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र व भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर अपनी पार्टी का विलय भाजपा में कर लिया।
बघेल बोले- कांग्रेस विचार कर सकती है
84 साल के हो चुके कैप्टन पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन की वकालत कर रहे हैं। वे कह चुके हैं सत्ता चाहिए तो अकालियों के साथ गठजोड़ करना पड़ेगा, क्योंकि ये गठजोड़ तीन बार सूबे में मिलकर सरकार बना चुका है। इस मुद्दे से अलग कांग्रेस कैप्टन को भाजपा द्वारा हाशिये पर रखने का दावा करते हुए उन्हें घर वापसी का ऑफर कर रही है। इस बार ग्राउंड ईडी के समन को बनाया है। भूपेश बघेल ने कहा कि यदि कैप्टन घर वापसी पर विचार करना चाहते हैं वे कांग्रेस विचार कर सकती है मगर अंतिम निर्णय हाईकमान लेगा। उनके अनुसार कैप्टन पंजाब की राजनीति के बड़ा व असरदार चेहरा हैं।
कांग्रेस की सहानुभूति
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व विधायक परगट सिंह ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा, जैसे ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा में में अपनी पोजीशन व पंजाब के बारे में पार्टी की समझ पर सवाल उठाए, वैसे ही ईडी का समन आ गया। इससे पहले, जब वे मुख्यमंत्री के तौर पर पंजाब और किसानों के हितों के लिए खड़े हुए थे, तो कथित तौर पर उन्हें रोकने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया था। फिर उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव डाला गया। अब उनके साथ जैसा बर्ताव किया जा रहा है, वह किसी भी पंजाबी नेता के लिए एक चेतावनी की मिसाल होनी चाहिए जो ऐसा कदम उठाने के बारे में सोच रहा हो।