चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति ने केंद्र शासित प्रदेश में संचालित और स्थापित किए जाने वाले बिना बिस्तर वाले स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को लेकर महत्वपूर्ण सार्वजनिक नोटिस जारी किया है।
समिति ने ऐसे सभी स्वास्थ्य केंद्रों को पर्यावरण संबंधी वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सहमति प्राप्त करने की सलाह दी है।
नोटिस में बताया गया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी औद्योगिक क्षेत्रों के वर्गीकरण के अनुसार बिना बिस्तर वाले स्वास्थ्य देखभाल केंद्र हरित श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ऐसे संस्थानों को जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।
समिति के अनुसार, बिना बिस्तर वाले स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों के संचालन अथवा स्थापना के लिए जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के लागू प्रावधानों के तहत चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति से आवश्यक सहमति प्राप्त करना जरूरी है। इसमें मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ भविष्य में स्थापित किए जाने वाले केंद्र भी शामिल हैं।
31 अगस्त तक लेने की सलाह
सीपीसीसी ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश में पहले से संचालित तथा आगामी सभी बिना बिस्तर वाले स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को 31 अगस्त 2026 तक समिति से आवश्यक सहमति प्राप्त करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में पर्यावरणीय नियमों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सहमति प्राप्त नहीं करने की स्थिति में पर्यावरण संबंधी कानूनों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
समिति के इस नोटिस के बाद शहर में संचालित बिना बिस्तर वाले क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य संबंधित स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को अपने संस्थान की श्रेणी और आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति की स्थिति की जांच करनी होगी। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।