मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच कर रही सीबीआई अब नशीली दवाओं की आपूर्ति के नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, मोहाली और कुराली स्थित दो दवा फैक्ट्रियां जांच एजेंसी के रडार पर हैं।
मामले के आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने पुलिस पूछताछ में दवाओं की खेप मोहाली से मंगवाने की बात कही थी। अब इन फैक्ट्रियों में दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
सूत्रों का दावा है कि इन फैक्ट्रियों से मानसा में नशीली दवाओं की आपूर्ति होती थी। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि दवाएं किन माध्यमों से मानसा पहुंचती थीं और इस नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी। मानसा में 13 अक्तूबर को अश्वनी कुमार पर झोटा की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा था।
उत्पादन और बिक्री रिकॉर्ड की पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई फैक्टरी संचालकों और उनके साझेदारों से उत्पादन और बिक्री का रिकॉर्ड मांग सकती है। जांच में यह मिलान किया जाएगा कि कितनी दवाओं का उत्पादन हुआ, उनकी आपूर्ति किन वितरकों और मेडिकल स्टोरों को की गई और बिक्री के लिए कौन-से बिल जारी किए गए। इससे नियमों के उल्लंघन के जरिए दवाओं की आपूर्ति किए जाने का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में ड्रग इंस्पेक्टरों और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। सूत्रों के अनुसार, निलंबित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित होने के बाद कथित तौर पर कम समय में बहाल होने की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है।
13 अक्तूबर को हुई थी हत्या
मानसा के एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्तूबर को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और उसकी पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। झोटा की हत्या के बाद पूरे पंजाब में आक्रोश फैल गया है।