पठानकोट के गांव गुलपुर सिंबली के पास यूबीडीसी नहर से निकलते रजवाहे (स्थायी वाटर सप्लाई) को सिंचाई विभाग की तरफ से पक्का किए जाने बाद पानी छोड़ने के कुछ समय बाद ही यह अलग-अलग जगह से टूट गया। एक करोड़ से ज्यादा की लागत से बने इस रजवाहे के गैर मियारी बनने पर सवाल खड़े हो गए है।
वहीं, स्थानीय लोगों ने जल स्त्रोत विभाग के प्रिंसिपल सचिव से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों के मुताबिक अगर इसकी उसारी ढंग से करवाई होती तो विभाग का क्वालिटी कंट्रोल विंग भी सही काम करवाता और आज यह स्थिति ना बनती।
बता दें कि गुलपुर माइनर जो चटपट बनी से लेकर सिलट इजेक्टर बगियाल तक साढ़े 3 किलोमीटर लंबाई वाला यह रजवाहा तैयार करके इसमे पानी छोड़ा गया था। जबकि 6 जून 2025 को हलका भोआ के विधायक और केबिनेट मंत्री पंजाब लाल चंद कटारूचक्क ने इसका उद्दघाटन किया था। हैरानी की बात यह है कि अभी इसे 2 जगह (यूबीडीसी हाईडल नहर और एक अन्य जगह) पर कनेक्ट करना बाकी था, इसमें पानी छोड़ दिया गया। विभागी अधिकारियों के मुताबिक धान की बोआई सीजन होने के चलते पानी छोड़ना पड़ा।
अमर उजाला टीम ने जब इस रजवाहे का निरीक्षण किया गया तो देखा कि कुछ सलेबें टूटी हुई और कुछ जगह दरारें आ चुकी थी। जबकि टूटी जगह को रेत की बोरियां और काले लिफाफे के साथ ढका हुआ था, ताकि पानी बाहर ना आ सके और किसी को टूटे रजवाहे बारे पता ना चले। जहां-जहां से रजवाहा टूटा हुआ था वहां से उसका पानी भी ओवरफ्लो होकर बाहर फैला हुआ था।
गांव के किसान देवराज सैनी, जनकराज, प्रीतम सिंह, गुरमीत सिंह, शाम लाल आदि का कहना है कि यह रजवाहा कम से कम 5 वर्ष तक चलना चाहिए था, लेकिन यह तो बनते ही टूट गया। इस तरह विभागीय अधिकारियों ने सरकारी पूंजी को बर्बाद किया है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
विभाग के संबंधित जेई तरसेम लाल के मुताबिक अभी यह काम अधूरा था कि धान की बोआई कारण पानी छोड़ना पड़ा। बोआई सीजन खत्म होने के बाद कनेक्टिविटी कर दी जाएगी। रजवाहे के किनारों पर पापलर पेड़ लगे हुए थे। जब आंधी तूफान आया तो वे गिर गए। जिससे रजवाहे को नुकसान हुआ है। ठेकेदार को अभी पूरी अदागिदी नहीं की गई। इस कारण धान की बिजाई का सीजन जाने के बाद मरम्मत करवाई जाएगी।