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जिला परिषद व पंचायत समिति चुनाव: भाजपा के पास खोने के लिए खास नहीं... इन चुनावों के पार्टी के लिए क्या मायने?

Tue, 09 Dec 2025 06:20 AM IST
अंकेश ठाकुर मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

पंजाब में भाजपा जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ रही है। भाजपा ने 1000 से अधिक पंचायत समिति और 200 से अधिक जिला परिषद सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
 
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भाजपा - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के पास खोने के लिए कुछ खास नहीं है लेकिन ग्रामीण इलाकों में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी यह चुनाव अकेले लड़ रही है। हाईकमान की हरी झंडी के बाद भाजपाइयों की टीमें जोश से गांवों में सक्रिय हो चुकी हैं।

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भाजपा ने 1000 से अधिक पंचायत समिति और 200 से अधिक जिला परिषद सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके बहुत से प्रत्याशियों को परचा भरने से रोका गया, अन्यथा यह आंकड़ा इससे अधिक होता। ग्रामीणों के बीच अपने पकड़ बनाने के इरादे से पंजाब में आई बाढ़ के दौरान एक विशेष रणनीति के तहत गांव-दर-गांव पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाकर भाजपाइयों ने लोगों से जुड़ने का प्रयास किया।

जालंधर में आठ वेयरहाउस बनाए गए और विभिन्न भाजपा शासित राज्यों से भारी मात्रा में राहत सामग्री यहां एकत्रित की गई। उसके बाद ग्रामीण हलकों में सक्रिय स्थानीय भाजपा नेताओं के जरिये बाढ़ पीड़ितों की फेहरिस्त तैयार कर उनकी जरूरतों के मुताबिक वेयरहाउसों से राहत सामग्री ग्रामीणों तक पहुंचाई गई।
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चुनाव प्रचार के दाैरान ग्रामीणों को यह भी बताया जाएगा कि पंजाब सरकार यदि केंद्र का सहयोग करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों का बीमा करवा देती तो बाढ़ पीड़ित किसानों को इसका बड़ा लाभ मिलता। गांवों में विशेष शिविर लगाकर ग्रामीणों से केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए सीधे ऑनलाइन आवेदन करवाए गए। बाद में इन शिविरों पर विवाद हुआ और पंजाब पुलिस ने इन शिविरों को रुकवाकर भाजपा नेताओं को हिरासत में लिया।

ग्रामीणों में जनाधार जानना चाहती है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता बिना किसी गठबंधन के अकेले ही पंजाब में खुद को साबित करना चाहते हैं। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी हाईकमान ने भी इस बाबत साफ संकेत दे दिए हैं और पार्टी लाइन पर ही भाजपा पंजाब में आगे बढ़ रही है। इसलिए जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के जरिये भाजपा यह जानना चाहती है कि सूबे में उनका जनाधार क्या है ताकि उसी आधार पर फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाई जा सके।

जुड़ाव के लिए डीबीटी स्कीमों का सहारा

ग्रामीण विकास को अपना मुख्य मुद्दा बनाते हुए सभी जिलों में भाजपा नेताओं की टीमें गांवों में जाकर ग्रामीणों को उनसे संबंधित उन केंद्रीय योजनाओं के बारे में बताएंगी जिसके अंतर्गत सीधा लाभ उनके खातों में ट्रांसफर होता है। इनमें 16 ऐसी डीबीटी स्कीमें हैं, जो कृषि और किसान कल्याण से जुड़ी हैं। इनमें से 15 स्कीमों का सीधा नकद लाभ किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इन्हीं डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर वाली स्कीमों के बारे में बताते हुए ग्रामीणों को इसके लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा।
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हर मतदाता को बता रहे मोदी सरकार का विजन

पंजाब भाजपा पूरे उत्साह के साथ इन चुनाव को पहली बार इतने बड़े स्तर पर लड़ रही है। हम हर मतदाता से जुड़कर उनसे मोदी सरकार का विजन बताते हुए पंजाब को आगे ले जाने की बात कर रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं कि कैसे पंजाब सरकार डीबीटी स्कीमों का लाभ उन तक नहीं पहुंचने दे रही है। हम पंजाबियों से यही आग्रह कर रहे हैं कि एक बार वह भाजपा को अपनी सेवा का मौका दें। - अनिल सरीन, प्रदेश महासचिव, पंजाब भाजपा
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