पंजाब व हरियाणा के जिलों में इस समय बड़ी संख्या में पराली जलाई जा रही है। इसका असर कई जगह देखा भी गया है लेकिन चंडीगढ़ में फिलहाल इसका असर नहीं है। दरअसल हवा इस समय पश्चिमी है। इस वजह से पराली का धुआं चंडीगढ़ में नहीं आ रहा है। पराली का धुआं हवा की गति व उसकी दिशा पर काफी हद तक निर्भर करता है।
चंडीगढ़ में फिलहाल इस वजह से बढ़ा है
चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण एग्जास्ट (धुआं) और नॉन एग्जास्ट (कार के पहियों से सड़क पर रगड़ने से उड़ने वाली धूल) की वजह से बढ़ा हुआ है। चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है। एक अध्ययन के मुताबिक चंडीगढ़ में प्रत्येक एक हजार व्यक्ति पर 878 वाहन रजिस्टर्ड हैं। जब वाहन सड़क पर चलते हैं तो उनके टायर सड़क पर घिसते हैं। इस घर्षण से निकलने वाले तत्व भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। पीजीआई ने प्रदूषण के 25 साल के डाटा का आकलन कर पाया था कि चंडीगढ़ में बढ़ते प्रदूषण की एक बड़ी वजह वाहनों की बढ़ती संख्या है।
ठंड के साथ बढ़ने लगेगा वायु प्रदूषण
पीजीआई के पर्यावरण अध्ययन के एडिशनल प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया कि ठंड बढ़ते ही वायुमंडलीय सतह नीचे आएगी। इससे प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाए नीचे रहेंगे, जो हवा को दूषित करेंगे। हालांकि, केंद्र सरकार व यूटी प्रशासन का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत एक साथ कई कदम उठा रहे हैं, जिसका असर जल्द ही दिखेगा।