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Kapurthala: पार्क की जगह पर काट दिए दुकानों के प्लाट; नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन और ईओ अदालत में तलब

Wed, 18 Sep 2024 10:40 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, कपूरथला (पंजाब)

सार

कपूरथला नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन और ईओ को अदालत ने तलब किया है। मामला मार्केट कॉप्लेक्स में पार्क की जगह पर दुकानों के प्लाट काटकर बेचने का है। 
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कपूरथला नगर सुधार ट्रस्ट। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कपूरथला नगर सुधार ट्रस्ट के मार्केट कॉम्प्लेक्स से एक दुकानदार की याचिका की सुनवाई में एडिशनल सेशन जज की अदालत ने 19 सितंबर को नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन और ईओ को नोटिस भेज तलब किया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इंसाफ की गुहार लगाते हुए उसकी दुकान के साथ लगते पार्क को दुकानों में तब्दील कर बेचने के आरोप लगाए हैं। 

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हालांकि, ट्रस्ट के चेयरमैन गुरपाल सिंह इंडियन ने कहा कि यह सारा मामला उनके कार्यकाल से पहले का है और जिस जमीन को पार्क बताया जा रहा है, वह पार्क नहीं है। लोकल बॉडी विभाग की मंजूरी के बाद ही नियमों का पालन करते हुए वर्ष 2021 में दुकानों की बोली की गई थी।

ट्रस्ट मार्केट के एक दुकानदार दीपक राय ने अदालत में दी गई याचिका में बताया कि नगर सुधार ट्रस्ट की स्कीम के तहत उन्होंने 1997 में एक दुकान ली थी, जिसकी 2004 में हुई रजिस्ट्री के अनुसार दुकान नं. 208 के साथ पार्क का विवरण भी दिया है और दुकान के साथ पार्क होने के चलते दुकान की कीमत अन्य दुकानों से अधिक दी थी, लेकिन अब ट्रस्ट ने उक्त पार्क को तहस-नहस कर पार्क में लगे पेड़-पौधों को भी काट दिया है और पार्क की जगह पांच दुकानों के प्लाट बनाकर एक ही मालिक को बेच दी है। दीपक राय ने अदालत से गुहार लगाई है कि उनकी दुकान के साथ पार्क ही रहने दिया जाए।
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वहीं, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन गुरपाल सिंह ने बताया कि ट्रस्ट के रिकार्ड अनुसार मार्केट में खाली पड़ी जमीन पर पांच दुकानें निकाय विभाग की मंजूरी और सीएलयू चेंज कर ऑनलाइन बोली के तहत बेची गईं हैं। दस्तावेजों के अनुसार 2003 में उक्त ओपन टू स्काई पड़ी जगह पर निकाय विभाग सीएलयू चेंज कर साइट को रेस्टोरेंट के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन जब रेस्टोरेंट के एरिया के हिसाब से बोली के अनुसार कोई खरीदार नहीं मिला, तब वर्ष 2021 में विभाग की मंजूरी लेकर उक्त स्थान पर 5 दुकानों के प्लाट की ऑनलाइन बोली हुई थी। इसको खरीदने वाले मालिक को दुकानों की पजेशन देने के लिए उक्त भूमि की सफाई कर निशानदेही करवाई जा रही थी। दीपक राय की ओर से दायर की गई याचिका बिल्कुल बेबुनियाद है।

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