पीजीआई के पैथोलॉजी विभाग में ऐसी लैबोरेटरी खुली है जो डीएनए की जांच करके बता देगी कि मरीज को कैंसर होगा या नहीं।
मॉलीक्यूलर डाइग्नोस्टिक लैबोरेटरी में उन मरीजों के डीएनए की जांच की जा सकेगी जिनके परिवार में किसी को कैंसर रहा हो या उस इलाके के रहने वाले हों जहां पर कैंसर का खतरा ज्यादा हो।
मंगलवार को इस लैबोरटरी का शुभारंभ पीजीआई की सब डीन प्रो. कुसुम जोशी ने किया।
इस लैबोरेटरी के निदेशक शेत मसीह ने बताया कि अभी तक कैंसर के डीएनए के म्यूटेशन की पहचान समय पर नहीं हो पाती थी, जिससे इलाज में देरी होती थी।
इस लैब में मरीज को कैंसर के बहुत मामूली संकेत यानी विंडो पीरियड पर ही इसकी जानकारी मिल जाएगी, जिससे समय पर इलाज करके उसकी जान बचाई जा सकेगी।
इस लैबोरेटरी में हेपेटाइटिस बी से लेकर हेपेटाइटिस सी तक की बीमारी को भी समय रहते पता किया जा सकेगा। शेत मसीह ने बताया कि इन बीमारियों की पहचान अभी तक एलाइजा और रैपिड टेस्ट के माध्यम से की जाती है।
इससे मरीज में इन बीमारियों को लेकर डेवलप होने वाली एंटीबॉडीज का पता चलता है। इस लैबोरेटरी में अब ऐसे मरीजों की डीएनए बेस्ड जांच कर यह पता किया जा सकेगा कि क्या मरीज में उक्त बीमारी के कोई वायरस तो नहीं पहुंच रहे हैं।