पहले सफेद मक्खी ने किसानों की हजारों एकड़ कपास की फसल को बर्बाद कर दिया
और अब बठिंडा के बागों में घुसपैठ कर चुकी सफेद मक्खी किन्नूओं को चाट रही
है।
इससे किसान चिंतित हैं। जिले के जिन किसानों ने बागबानी विभाग
से प्रेरित होकर फसली चक्कर से निकलकर अपने बागों में किन्नू लगाए थे उनके
रस को अब सफेद मक्खी ने चाटना शुरू कर दिया है। जिस के प्रभाव से किन्नूओं
का आकार तो छोटा हो ही रहा है साथ में किन्नूओं के पौधों पर आधे से ज्यादा
फल ही नहीं लग रहा।
रामां मंडी के किसान गुरतेज सिंह ने बताया कि
उन्होंने बागबानी विभाग के पीछे लगकर फसली चक्कर निकलने के लिए किन्नूओं की
काश्त शुरू कर बाग लगाए थे। इस बार सफेद मक्खी ने पहले उनकी कपास की फसल
को बरबाद कर दिया और अब किन्नूओं के रस को चाट कर उन्हें खत्म कर रही है।
किसानों का कहना था कि सफेद मक्खी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है ।
किसान
नेता शिंगारा सिंह मान का कहना था कि कपास की तरह किन्नूओं के भी प्रदेश
में नकली बीज और कीटनाशक दवाएं डीलरों की ओर से किसानों को बेची गई हैं।
जिस के चलते अब किन्नू काश्तकार किसान काफी परेशान हैं।
उधर
बागबानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर गुरदेव सिंह ढिल्लों का कहना था कि सफेद
मक्खी तो ठंड होने के चलते वैसे ही मर जाती है तो किन्नूओं की फसल पर कैसे
हमला करेगी। उन्होंने कहा कि किन्नूओं की फसल के खराब होने का सबसे बड़ा
कारण समय पर फसल को स्प्रे न करना है।