प्रदेश में सफेद मक्खी प्रभावित कपास की मुआवजा राशि का चेक देने का तरीका पहले दिन से ही विवादों में रहा।
इसके चलते हर दिन किसानों की ओर से धान के कास्तकारों को चेक देने व कपास की कास्त करने वालों के बजाय किसी अन्य के नाम या जमीन के मालिक के नाम पर चेक देने की शिकायतें आ रही हैं।
इसे लेकर मंगलवार को किसान संगठनों की ओर से डीसी को एक मांग पत्र सौंपा जाना था, लेकिन पुलिस ने उन्हें नहर पर ही रोक दिया।
इसके चलते किसानों ने रोजगार्डन चौक पर धरना देकर प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के अमरीक सिंह सीविया, मंजीत भुच्चो, गुरपाल दियोन, हरवंश बुर्ज, हरजीवन मेहमा भगवाना की अगुवाई में पीड़ित किसानों को मुआवजा राशि सही ढंग से न मिलने से व अन्य मांगो को लेकर डिप्टी कमिश्नर बठिंडा को एक मांग पत्र सौंपना था, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने नहीं दिया।
रोजगार्डन चौक के नजदीक धरना दे रहे किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा असली कास्तकारों की जगह अपने चहेतों को चेक दिए जा रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मेहमा भगवाना के पटवारी के पास जब किसान चेक मांगने गए तो उसने खुद ही अपनी पगड़ी उतार कर किसानों को पर्चा दर्ज करवाने की धमकी दी।
किसान नेताओं ने कहा कि अगर प्रशासन ने 6 जनवरी तक चेक असली कास्तकारों को न दिए तो वे अपना संघर्ष तेज करने को मजबूर होंगे।