सफेद मक्खी प्रभावित और कर्ज से तंग आकर जिले के दो किसानों ने आत्महत्या कर ली। गांव भैणीबाघा के नौजवान किसान गुरप्रीत सिंह उर्फ गनी (25) ने रविवार को अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
उस पर बैंक का 3 लाख 65 हजार, आढ़तियों का 3 लाख 40 हजार व एक अन्य जमींदार का 1.50 लाख रुपये का कर्ज था। वह 4 एकड़ जमीन का मालिक था।
उसके पिता बलविंदर सिंह और माता परमजीत कौर ने बताया कि चार से 3 एकड़ जमीन में कपास बीजा था, जो सफेद मक्खी के हमले से खराब हो गया।
काफी समय तक उसे कपास फसल का मुआवजा मिलने की उम्मीद रही, मगर मुआवजा भी नहीं मिल पाया। कर्ज की वजह से उसे आढ़ती और बैंक वाले परेशान करते थे।
इससे उसने घर में उस उस समय फंदा लगा दिया जब वहां कोई नहीं था। भारतीय किसान यूनियन (एकता) डकौंदा के गांव इकाई प्रधान लक्खा सिंह, मक्खण सिंह, किसान नेता गोरा सिंह भैणी बाघा, इकबाल सिंह मानसा महिंदर सिंह भैणीबाघा व लाल सिंह याला ने सरकार से मांग की है कि मृतक किसान गुरप्रीत सिंह के परिवार पर चढ़ा कर्ज तुरंत खत्म किया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी दी जाए।
उधर, गांव खारा में एक किसान ने कर्ज से तंग आकर फंदा लगाकर जान दे दी। किसान रेशम सिंह (40) शुक्रवार शाम को घर से पानी देने की बात कहकर खेत गया था।
करीब साढ़े 7 बजे उसने खेत में पेड़ से फंदा लगा दिया। किसान नेता इकबाल सिंह फफड़े भाईके ने बताया कि किसी समय किसान रेशम सिंह के पास दो एकड़ जमीन थी।
वहीं कर्ज की वजह से धीरे-धीरे उसकी जमीन बिक गई और मौजूदा समय में उसके पास केवल दो कनाल जमीन ही शेष थी। बीते समय में उससे जमीन ठेके पर लेकर कपास और ग्वार की फसल की बुआई की।
इससे उसको काफी उम्मीद थी, लेकिन सफेद मक्खी के हमले से उसकी पूरी फसल बर्बाद हो गई। उक्त किसान पर करीब छह लाख रुपये का कर्ज था। इससे आहत होकर रेशम सिंह ने सुसाइड कर लिया।
मृतक का शनिवार को गांव में अंतिम संस्कार किया गया। किसान नेता फफडे़ भाईके, भाकियू एकता उगराहां के नेता बल्लम सिंह मति व मजदूर मुक्ति मोर्चा के नेता सुखवीर सिंह खारा ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।
उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार को 10 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। मृतक किसान की एक बेटी है।