केंद्रीय हाईकमांड की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने के बाद सूबे में राजनीतिक सरगर्मियों ने तेजी पकड़ ली है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने कांग्रेसी नेता ताजपोशी समागम के मौके अपना शक्ति प्रदर्शन करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को ले जाने के लिए मीटिंगें कर रहे हैं।
यहां कांग्रेस का एक दल जिला प्रधान दर्शन सिंह बराड़ को हटाने को सरगर्म है। जिला कांग्रेस में शुरू हुई अंदरूनी बहस बुधवार को निहाल सिंह वाला में खुलकर सामने आ गई जब जाट महा सभा नेता का दल मीटिंग में शामिल नहीं हुआ।
निहाल सिंह वाला की अग्रवाल धर्मशाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह की बठिंडा रैली की तैयारियों के लिए कांग्रेस की तरफ से की जा रही मीटिंग आपसी गुटबंदी और तकरार के कारण बेनतीजा रही।
इस दौरान अलाइड वर्कर्स यूनियन के प्रधान अजमेर सिंह और कांग्रेस के नेताओं की आपसी तकरार हो गई। भारी हंगामे के कारण मीटिंग को रद्द करना पड़ा। इसमें कांग्रेस के नेता एवं जाट महा सभा के जिला प्रधान हरी सिंह खाई का दल भी शामिल नहीं हुआ।
जिला कांग्रेस प्रधान दर्शन सिंह बराड़ ने कहा कि वे किसी दबाव में अध्यक्षता पद नहीं छोड़ेंगे। वैसे भी वे अपनी मर्जी से इस पद को छोड़ सकते हैं।
पूर्व विधायक विजय साथी ने कहा कि सभी कांग्रेस नेता एकजुट हैं, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह की ताजपोशी समागम के बाद उनसे कोई राय पूछी जाएगी तो ही वे अपने विचार पार्टी प्रधान को बताएंगे।
उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की बठिंडा में रैली करने की चुनौती कबूल की है। उन्होंने कहा कि कैप्टन के प्रधान बनने से पार्टी में नई रूह और जोश आया है। इस लिए पहले सभी कांग्रेस नेता इस चुनौती भरे माहौल में कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हैं।
यहां बताने योग्य है कि पूर्व विधायक दर्शन सिंह बराड़ ने प्रताप सिंह बाजवा के पंजाब कांग्रेस प्रधान बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की रैलियों में हिस्सा लेना भी छोड़ दिया था।
इस दौरान पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने जगदर्शन कौर को जिला कांग्रेस प्रधान के पद से हटा कर दर्शन बराड़ को जिला कांग्रेस की कमान सौंप दी थी।