बठिंडा। जहां पूरे पंजाब में दिवाली पर लोग खुशी में पटाखे चलाएंगे, वही गांव फूस मंडी और जस्सी के करीब 200 घरों में लोग दीये जलाने के बाद अपने घरों में बैठ जाएंगे। यहां न तो कोई पटाखे फोड़ सकेगा और न ही फुलझड़ी से बच्चों का मन बहला सकेगा।
बठिंडा जिला प्रशासन ने इन दोनों गांवों में पटाखे चलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। दरअसल इन गांवों के नजदीक ही आईबीपी और भारत पेट्रोलियम के आयल डिपो मौजूद है। इन तेल डिपो से बठिंडा और आसपास के जिलों, कस्बों के पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल सप्लाई होता है। ऐसे में पटाखे की चिंगारी ही काफी बड़ा नुकसान कर सकती है। गांव जस्सी के जसबीर सिंह ने बताया कि हर साल ही इन गांवों में तेल के भंडार होने के कारण जिला प्रशासन की तरफ से पटाखे चलाने पर पाबंदी लगा दी जाती है। गांव फूस मंडी के जस्सा सिंह का कहना है कि करीब 18 साल से गांव के लोग दीवाली न मनाने का संताप भोग रहे है जबकि इन तेल भंडारों को बने करीब 25 वर्ष हो चुके हैं। डीसी केके यादव ने फौजदारी संहिता की धारा 144 अधीन दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए अमन कानून की स्थिति को कायम रखते हुए आदेश जारी किए हैं कि दीवाली के समय इन गांवों में तेल भंडार के 500 मीटर के दायरे में वह पटाखे जो हवा में जाकर फटते हैं या दूर तक मार कर सकते है, के चलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई गई है।