पंजाब की चुनावी राजनीति में दलित और हिंदू मतदाता दोनों ही महत्वपूर्ण राजनीतिक वर्ग माने जाते हैं। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का यह वादा दोनों समुदायों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने पंजाब में सरकार बनने पर दो उपमुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है। पार्टी नेता सुखविंदर सिंह अगवान ने कहा कि इनमें से एक दलित समाज से होगा। दूसरा उपमुख्यमंत्री हिंदू भाईचारे से बनाया जाएगा।
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अगवान ने कहा कि पंजाब के विकास और सामाजिक न्याय के लिए सत्ता में हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। पार्टी का लक्ष्य सरकार बनने पर विभिन्न समुदायों को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है। यह घोषणा पंजाब की राजनीति में सामाजिक और धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह भी दो उपमुख्यमंत्रियों का यह सूत्र सामने रख चुके हैं। उन्होंने भी दलित समाज और हिंदू भाईचारे से एक-एक उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही थी। अगवान के बयान ने इस घोषणा को फिर से चर्चा में ला दिया है।
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2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में दलित समुदाय की आबादी करीब 32 फीसदी है। यह देश में अनुसूचित जाति की आबादी के लिहाज से सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले राज्यों में से एक है। इसी जनगणना के धार्मिक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में हिंदू आबादी करीब 38.5 फीसदी थी।