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डेरे पर कब्जे को लेकर निहंगों के दो गुटों के बीच फायरिंग

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आतंकवाद के दौरान पंजाब पुलिस की ‘कैट’ बन कर झूठे मुकाबलों में हिस्सा लेने वाला निहंग मुखिया महरूम अजीत सिंह पुहला द्वारा जालंधर-ब्यास रोड पर बना गए डेरे पर कब्जे को लेकर सोमवार तड़के दो गुटों के बीच टकराव हो गया। इस दौरान हुई फायरिंग में तीन निहंग जख्मी हो गए। वहीं हमला करने वाले निहंगों का दावा है कि गोलियां लगने से उनका एक साथी मारा गया हालांकि डीएसपी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
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घटना सोमवार तड़के तीन बजे की है। इस डेरे पर काबिज अजीत सिंह पुहला के भांजे डिंपी पुहला और दूसरे गुट की अगुवाई कर रहे निहंग रंजीत सिंह के बीच करीब 50 राउंड फायरिंग हुई। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के गांवों के लोग भी घरों से बाहर निकल आए। डीएसपी बाबा बकाला हरकृष्ण ने बताया कि निहंग रंजीत सिंह अपने साथ 30-35 हथियारबंद निहंगों को गाड़ियों में बैठा कर अजीत सिंह पुहला के डेरे पर आया था। डेरे पर कब्जा करने की नीयत से आए रंजीत सिंह ने पहले तो डेरे के भीतर जाने का प्रयास किया, जब डिंपी पुहला ने इसका विरोध किया तो उसके साथियों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी। दोनों पक्षों के बीच लगभग एक घंटे तक गोलियां चलती रही जिससे तीन निहंग जख्मी हो गए। तीनों को पहले बाबा बकाला के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां से उन्हें अमृतसर जीएनडीएच में रेफर कर दिया गया। इनकी हालत गंभीर है।
डेरे में काबिज डिंपी पुहला ने कुछ दिन पूर्व पुलिस को शिकायत दी थी कि निहंग रंजीत सिंह उनके डेरे पर हमला कर सकता है। पुलिस ने डेरे की सुरक्षा के लिए पांच पुलिस मुलाजिमों की तैनाती की थी। घटना के समय पुलिस मुलाजिम वहां थे या नहीं, इस बारे में पुलिस अभी कुछ भी बताने से इंकार कर रही है।
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वहीं निहंग रंजीत सिंह के समर्थक बलविंदर सिंह ने दावा किया कि डेरे पर उनका अधिकार है। उनके पास सभी दस्तावेज हैं। साथ ही उसने बताया कि गोलीबारी के दौरान उनका एक निहंग मारा गया है। डीएसपी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की। डीएसपी के अनुसार रंजीत सिंह सहित कुछ निहंग सिंह को गिरफ्तार किया गया है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच में जो भी आरोपी पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। याद रहे कि निहंग मुखिया अजीत सिंह पर 2008 में अमृतसर जेल में हमला हुआ था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
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