अमृतसर। जलियांवाला बाग में देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों को कई जगह पर शहीद लिखा गया पर अब तक इन शहीदों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा नहीं मिल सका। स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलाने के लिए इन शहीदों के परिवार पिछले सौ वर्ष से प्रयास कर रहे हैं। यह वह शहीद हैं जो 13 अप्रैल वर्ष 1919 को बैसाखी वाले दिन जलियांवाला बाग में अंग्रेज सैनिक अधिकारी जनरल डायर की गोलियों का शिकार 488 भारतीयों के परिवार पिछले 40 वर्ष से अपने पूर्वजों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलाने के प्रयास कर रहे हैं।
जलियांवाला बाग शहीद परिवार समिति के प्रधान महेश बहल ने बताया कि 13 अप्रैल 1919 को उनके दादा लाला हरी बहल के साथ हजारों की संख्या में लोग जलियांवाला बाग में बैसाखी पर्व मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। उसी समय अंग्रेज सैनिक जनरल डायर ने सैनिकों के साथ मिलकर उनपर गोलियां चला दी। उस समय वहां 1100 के करीब लोगों की मौत हुई। पंजाब सरकार अभी तक ऐसे 488 परिवारों का पता लगा सकी है।
उन्होंने बताया कि जलियांवाला बाग में गोलियों का शिकार बने लोगों के परिवारों को शहीद के वारिसों के तौर पर पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए केंद्र सरकार ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को शहीद का दर्जा दिया। घटना के 100 साल बीत जाने के बाद भी अब तक जलियांवाला बाग में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि अंग्रेज सरकार को जलियांवाला बाग गोलीकांड के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि महेश बहल ने बाग में शहीदों के कुछ परिवारों के साथ मिलकर जलियांवाला बाग शहीद परिवार समिति का गठन किया।
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कई परिवार जा बसे हैं पाकिस्तान
जलियांवाला बाग शहीद परिवार समिति के प्रधान महेश बहल बताते हैं कि सरकार अभी तक जलियांवाला बाग में मारे गए लोगों के परिवारों तक नहीं पहुंच सकी। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में मारे गए कई लोगों के परिवार तो देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान में जाकर बस गए। उन्होंने बताया कि उनके दादा लाला हरी बहल के कई दोस्त मुसलमान थे। जो घटना के समय उनके साथ मौजूद थे।
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जीएनडीयू की टीम लगाएगी शहीद परिवारों का पता
जानकारी के अनुसार 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में 1650 गोलियां चलीं। इससे मरने वालों की संख्या सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 488 है। जलियांवाला बाग में मारे गए कई लोगों के परिवारों का अभी तक पता ही नहीं चल सका। इसके लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के माहिरों की एक टीम गठित की है। यह टीम जलियांवाला बाग में तब मारे गए लोगों के परिवार का पता लगाकर एकर रिपोर्ट सरकार को देगी जिससे आंकड़े को सरकार के रिकार्ड में दर्ज किया जा सके और उनके गांवों में यादगार बनाई जा सके।