अमृतसर। जिस भतीजे को चाचा ने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया, उसी भतीजे ने उसके सीने में गोलियां उतार दीं। रामतीर्थ रोड स्थित आईटीआई में काम करने वाला गुरदीप सिंह (55) घर बनाने के लिए शनिवार को अपने जद्दी गांव के एक मिस्त्री से घर पर होने वाले खर्च का अंदाज लेने पहुंचा था। जैसे ही वह मिस्त्री के घर से बाहर निकला तो सामने अपने भतीजे अमनदीप सिंह को देख हैरान हो गया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता या अपने भतीजे से बात कर पाते, अमनदीप ने पिस्तौल निकाल कर गुरदीप सिंह की छाती में 2 गोलियां मार दीं। वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही दम तोड़ दिया। छेहरटा के काले गांव में दो भाई हरजिंदर सिंह पप्पू और गुरदीप सिंह अपने परिवारों के साथ रहते थे। बड़ा भाई हरजिंदर सिंह मेहनत मजदूर करता था जबकि गुरदीप सिंह आईटीआई में सेवादार के तौर पर काम करता था। दोनों भाइयों की जिंदगी सामान्य चल रही थी दोनों भाई अपने-अपने परिवार के साथ रह रहे थे। इस बीच ही दोनों में जमीन को विवाद हो गया और दोनों में कई बार झगड़ा भी हुआ। वर्ष 2013 में गुरदीप ने अपने बड़े भाई हरजिंदर सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस हादसे के बाद गुरदीप सिंह का परिवार अपने जद्दी गांव काले को छोड़ कर रामतीर्थ रोड स्थित आनंदपुर एवेन्यू में आकर रहने लगा। हरजिंदर सिंह हत्याकांड में अदालत ने आरोपी गुरदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई। करीब छह माह पहले ही गुरदीप सात साल की सजा पूरी करने के बाद रिहा होकर अपने घर आया था। चाचा की रिहाई के बाद से ही हरजिंदर सिंह का लड़का तभी से अपने चाचा की हत्या के षड्यंत्र रचने में लगा था। अमनदीप सिंह को पता चला कि उसका चाचा गांव में आया हुआ है, तो वह वहां पहुंच गया। अमनदीप ने अपने चाचा गुरदीप को मिस्त्री के घर से बाहर निकलते ही रोक लिया और पिस्तौल निकाल कर उसके सीने में दो गोलियां उतार अपने पिता की हत्या का बदला लेकर मौके से फरार हो गया।