पिछले माह फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित नीलकंठ अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई छह लोगों की मौत के मामले में जांच कमेटी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैरा को सौंप दी। 24 अप्रैल को हुई इन मौतों की जांच के लिए डीसी ने स्थानीय निकाय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रजत ओबराय और सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह की कमेटी गठित की थी। रिपोर्ट आने के बाद डीसी ने नीलकंठ अस्पताल को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची से हटा दिया है।
इस रिपोर्ट में सामने आया है कि नीलकंठ अस्पताल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए निर्धारित मापदंड पूरे नहीं कर रहा था। उसकेपास माहिरों की भी कमी है और एनेस्थीसिया सहित अन्य डाक्टर पूरे समय काम नहीं करत हैे। कमेटी ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के पास कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन का बफर स्टाक की व्यवस्था भी नहीं थी। घटना वाले दिन अस्पताल प्रबंधकों ने ऑक्सीजन खत्म होने के बारे में जिला प्रशासन को कोई जानकारी नहीं दी और ऑक्सीजन की मांग भी बहुत देरी से की गई। इस रिपोर्ट के आधार पर डीसी खैरा ने नीलकंठ अस्पताल को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सूचीबद्ध किए गए अस्पतालों की सूची से बाहर कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड ऑफ अस्पताल (एनएबीसी) को भी पत्र लिखा कि इस अस्पताल की पात्रता का दोबारा से मूल्यांकन किया जाए।
डीसी खैरा ने कहा कि जांच कमेटी के पास मरीजों के रिश्तेदारों ने यह आरोप भी लगाए हैं कि अस्पताल कोरोना मरीजों से अतिरिक्त पैसे की वसूली करता रहा है। इस मामले को जिला स्तर पर ओवरचार्जिंग बाबत बनी कमेटी के पास अगली कार्रवाई के लिए भेजने की सिफारिश की गई है। खैरा ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद अस्पताल को अलग-अलग सरकारी स्कीमों के तहत इलाज करने की सुविधा पर रोक लगाने के लिए भी राज्य सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि नीलकंठ अस्पताल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए भी सेहत विभाग पंजाब को लिखा जा रहा है।