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Amritsar News: कीर्तन व कवीशरी गायन से बताई शहीद ऊधम सिंह की गौरवगाथा

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फोटो- 02
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संवाद न्यूज, एजेंसी
अमृतसर। 13 अप्रैल, 1919 के दिन हुए जलियांवाला बाग कांड का बदला लेने वाले अमर सेनानी शहीद ऊधम सिंह का 85वां शहीदी दिवस वीरवार को चीफ खालसा दीवान की ओर से संचालित पुतलीघर के सेंट्रल यतीमखाने में मनाया गया। इसमें सीकेडी के प्रधान डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर के अलावा मेंबर इंचार्ज डाॅ. आत्मजीत सिंह बसरा, मोहनजीत सिंह भल्ला शामिल हुए। समागम में पहले सुबह श्री सुखमनी साहिब का पाठ हुआ। वहां पढ़ने वाले बच्चों ने कीर्तन और कवीशरी गायन भी किया। इसमें शहीद ऊधम सिंह की गौरवगाथा को बयान किया गया। इसके बाद शहीद के रहने वाले कमरे में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. बसरा और भल्ला ने बताया कि ऊधम सिंह सुनाम से अपने बड़े भाई के साथ यतीमखाने में साल 1907 में आए थे और यहीं परवरिश पाई। जलियांवाला बाग में हो रही जनसभा में उनकी ड्यूटी पानी पिलाने की थी। इसी बीच जनरल डायर ने गोलियां चला कर सैकड़ों भारतीयों को शहीद कर दिया। ऊधम सिंह ने वहीं इस घटना का बदला लेने का संकल्प लिया और लंदन में जाकर गोली चलाने का आदेश देने वाले अंग्रेज अफसर माइकल ओ ड्वायर को 21 साल बाद 13 मार्च 1940 के दिन गोली मार दी। उनको 31 जुलाई 1940 को फांसी दे दी गई थी।
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चारपाई, बर्तन और दस्तावेज सहेज कर रखे : डॉ. बसरा
डॉ. बसरा ने बताया कि यतीमखाना में उनके कमरे में उनकी चारपाई, बर्तन और अन्य दस्तावेज सहेज कर रखे हुए हैं। संस्था हर साल उनका शहीदी और जन्मदिन मना कर उनको याद करती है। उन्होंने बताया कि ऊधम सिंह के बचपन का नाम शेर सिंह और उनके भाई का नाम मुक्ता सिंह था जिन्हें यतीमखाना में क्रमश: ऊधम सिंह और साधु सिंह के रूप में नए नाम मिले।
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