-सीमा पर होता है तनाव तो शुरू हो जाता हैं संघर्ष का दौर
-नशीले पदार्थों, हथियारों की तस्करी का भी करते हैं सामना
पंकज शर्मा
राणीया, (अमृतसर)। करीब तीन हजार की आबादी वाला गांव राणीया संघर्ष, वीरता और उम्मीद की कहानी बयां करता है। यह गांव भारत-पाक सीमा पर स्थित है। यहां ग्रामीण सिर्फ जिंदगी से संघर्ष नहीं कर रहे बल्कि इनका संघर्ष राष्ट्र के लिए भी है। यही वजह है जैसे ही भारत-पाक सीमा पर तनाव हुआ तो गांव अंधेरे में डूब गया पर गांव के लोग अपनी माटी से इतना प्यार करते हैं कि गांव नहीं छोड़ा। हालात से जूझे और अब अपने गांव में जिंदगी को पटरी पर लौटा लाए हैं।
ग्रामीणों की चुनौतियां हैं कि कम ही नहीं होतीं। पाकिस्तान के साथ हुई कई जंग में यह गांव गवाह बना है। अब भी गांव नशीले पदार्थों, हथियारों की खेप और तस्करों की गतिविधियों से जूझता है। हालांकि बीएसएफ और पुलिस की टीम अक्सर यहां नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप पकड़ती हैं। अब स्थानीय प्रशासन ने भी सीमा पर बसे इस गांव में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। बीएसएफ के जवानोंं की गश्त गांव के लोगों के लिए राहत का काम करती है। इस गांव की ताकत है स्थानीय लोगों का हौसला और जज्बा। यह गांव उम्मीदों की एक ऐसी कहानी है, जो बताती है कि हालात चाहे जैसे हों, जिंदगी चलती रहेगी, उम्मीदें ज़िंदा रहेंगी।
तनाव में बदल जाती हैं दिनचर्या
सीमा पर तनाव बढ़ते ही राणिया के लोगों की दिनचर्या बदल जाती है। गांव के लोग हर आहट पर चौकस रहते हैं। छोटे-छोटे बच्चे घर के भीतर ही खेलते हैं और महिलाएं चौखट पर बैठकर अपने परिवार की सलामती की दुआएं करती हैं। हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जाता है। ग्रामीण बचितर सिंह बताते हैं कि जब गोलियों की आवाज रात के सन्नाटे को चीरती हैं, तो पूरा गांव जैसे सांस रोक लेता है। लेकिन हमने यहां रहना सीखा है। यह हमारी जमीन है और हम इसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। हरविंदर सिंह और राजविंदर सिंह भी कहते हैं कि चाहे हालात जैसे हों, उन्होंने अपना गांव नहीं छोड़ा। हरविंदर सिंह ने कहा कि हमारे पुरखों ने इसी जमीन पर अपने खून-पसीने से फसलें उगाई हैं। तनाव कितना भी बढ़ जाए, हमें अपनी मिट्टी प्यारी है।
फिर से स्कूलों में बजने लगीं घंटियां
गांव में दो स्कूल हैं। तनाव कम होते ही गांव के स्कूल आबाद हो गए हैं। बच्चों की आवाजें स्कूल में गूंजने लगी हैं। स्कूलों की घंटियां बजने लगी हैं। यहां के ग्रामीण खेतीबाड़ी, दुकानदारी पर ही निर्भर हैं। भारत पाक के बीच तनाव कम होने पर दुकानों और चौराहों पर दोबारा से रौनक लौट आई है। गांव के लोग दोबारा से खेती-बाड़ी, पशुपालन और छोटे-मोटे व्यवसाय की ओर चल दिए हैं। स्थानीय निवासी बचितर सिंह ने बताया कि अब स्कूल खुल गए हैं। हमारे बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। हमको डर तो है पर उम्मीद भी है कि हमारा गांव खुशहाल होगा।
गांव के लोग प्रधानमंत्री और भारतीय सेना पर पूरा विश्वास रखते हैं। उन्हें यकीन है कि उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा और सीमांत गांवों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीण राजविंदर सिंह कहते हैं कि हमें अपनी सरकार और सेना पर पूरा भरोसा है। वे हमारी सुरक्षा के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।