सुखबीर के बायीं ओर एसजीपीसी प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल और दायीं तरफ डॉ. दलजीत सिंह चीमा भी जूतों की सेवा कर रहे थे। मजीठिया ने कई अन्य अकाली नेताओं के साथ लंगर हॉल में जाकर झूठे बर्तनों की सेवा की। सुखबीर बादल ने लगभग दो घंटे तक जोड़ा घर में सेवा करने के बाद लंगर के बर्तन मांजने की सेवा भी की।
वहीं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर लंगर की एक लोह के पास जाकर बैठ गईं, जहां उन्होंने परसादे तैयार किए। इस दौरान बादल परिवार कड़ी सुरक्षा के घेरे में रहा। पिछले साल भी अकाली दल सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल के साथ उनके पूरे परिवार और अकाली लीडरशिप ने इसी तरह सेवा निभाई थी।
शिअद (टकसाली) के कार्यक्रम में शामिल होंगे ढींढसा और बैंस बंधू: सेखवां
शिअद (टकसाली) के प्रवक्ता सेवा सिंह सेखवां ने दावा किया कि उनके दल द्वारा श्री गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल के सभागार में अकाली दल का 99वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा, पंजाब विधानसभा के पूर्व स्पीकर रवि इंद्र सिंह, बैंस बंधु (विधायक) सहित कई टकसाली अकाली हिस्सा लेंगे।
सेखवां ने कहा कि अकाली दल (टकसाली) का मुख्य उद्देश्य अकाली दल की विरासत को बादल परिवार से मुक्त करवाना है। बादल परिवार के चुंगल से एसजीपीसी को मुक्त करवाना और श्री अकाल तख्त साहिब की शान को दोबारा बहाल करना है। अकाली दल के समानांतर आयोजित कार्यक्रम को लेकर सेखवां ने अकाली दल से बागी अमरपाल सिंह बोनी के साथ कार्यक्रम स्थल का दौरा भी किया।
टकसाली बताएं, वह किस परिवार का अकाली दल पर कब्जा चाहते हैं: डॉ. चीमा
शिअद (बादल) के नेता डॉ. दलजीत सिंह ने कहा कि अकाली दल (टकसाली) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सुखदेव सिंह ढींढसा के शामिल होने के जितने भी दावे किए जाए, यह तब तक सच नहीं है, जब तक ढींढसा खुद इस संदर्भ में कोई बयान नहीं देते। ढींढसा शिअद के वरिष्ठ नेता है। उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने अभी तक पार्टी के विरुद्ध कोई भी बयान नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव लड़ने वाला टकसाली अकाली दल बताएं कि उनके उम्मीदवारों को कितने वोट मिले थे। जब उनसे यह पूछा गया कि टकसाली अकाली नेता अकाली दल को बादल परिवार से मुक्त करने का संकल्प दोहरा रहे है, तो डॉ. चीमा ने कहा कि टकसाली नेता बताएं कि वह अकाली दल में किस परिवार का कब्जा चाहते हैं। सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़ ने कहा कि ढींढसा उनके पुराने साथी हैं लेकिन उनकी सोच अलग है। अकाली दल को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने में बादल परिवार की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।