शिरोमणि अकाली दल में छाए राजनीतिक और पंथक संकट दिन प्रतिदिन गहरे होते जा रहे हैं। शिरोमणि कमेटी की ओर से तख्त साहिबों के जत्थेदारों को पदों से हटाने के फैसले के खिलाफ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर से विरोध जताने के बाद माझा में शिरोमणि अकाली दल पूरी तरह विभाजित होने के किनारे पर पहुंचा गया।
माझा में बहुत सारे अकाली वर्कर व नेता यहां बिक्रम मजीठिया के साथ जत्थेदारों को हटाने के मुद्दे पर साथ आ गए हैं। वहीं, कुछ नेताओं ने इस फैसले को लेकर सुखबीर बादल का साथ देने का भी एलान कर दिया है।
इस मुद्दे पर सुखबीर बादल के समर्थकों ने सुच्चा सिंह लंगाह के नेतृत्व में इकट्ठा होना शुरू कर दिया, जबकि विरोधियों ने बिक्रम सिंह मजीठिया की अगुवाई में आना शुरू कर दिया है। कभी बिक्रम सिंह मजीठिया माझा के जरनैज के रूप में अकाली दल में अपने पहचान रखते थे।
अब बिक्रम के साथ समांनातर नया राजनीतिक सेंटर अकाली नेता सुच्चा सिंह लंगाह के आसपास बनना शुरू हो गया है, जिसे सुखबीर सिंह बादल की ओर से खुलकर समर्थन दे दिया है। माझा में अकाली दल के अंदर अब दो राजनीतिक सेंटर सुच्चा सिंह लंगाह और बिक्रम सिंह मजीठिया बन गए हैं।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी ने बागी बयान देनों वालों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस निकालने का फैसला लिया है। संभावना है कि बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ भी पार्टी की ओर से अनुशासन भंग कर बयानबाजी करने का नोटिस जारी कर दिया जाए। अगर बिक्रम मजीठिया के खिलाफ यह नोटिस जारी हो जाता है कि संभावना है कि माझा में पार्टी पूरी तरह दो ग्रुपों में विभाजित हो जाएगी।
मजीठिया के खिलाफ हो रहा प्रचार
बिक्रम मजीठिया के एसजीपीसी द्वारा हटाए गए जत्थेदारों के पक्ष में बयान दिए जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल का आईटी विंग भी मजीठिया के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है। आईटी विंग की जो टीम कभी बिक्रम मजीठिया के इशारों पर चलती थी, अब सोशल मीडिया पर यही टीम बिक्रम मजीठिया के खिलाफ प्रचार में जुट गई है।