शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि अफगानिस्तान केे गुरुद्वारा साहिब में हुए आतंकी हमले के बाद यदि वहां के सिख भारत में शरण के लिए आते हैं तो एसजीपीसी उनके पुनर्वास का हर संभव प्रबंध करेगी। एसजीपीसी अफगानिस्तान से आए सिखों और उनके बच्चों को उनकी शिक्षा और योग्यता के अनुसार रोजगार का प्रबंध भी करेगी। लौंगोवाल ने उक्त घोषणा उस समय की, जब आतंकी संगठनों की तरफ से अफगानिस्तान में बसे सिखों को दस दिन में देश छोड़ने की धमकी दी गई है।
लौंगोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को अफगानिस्तान में बसे सिखों की मदद के लिए गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। गुरुद्वारा साहिब में आतंकी हमले के बाद सिखों को अफगानिस्तान छोड़ देने की धमकियां बार-बार मिल रही है। यह चिंता का विषय है। आतंकवादियों की धमकियों के कारण वहां के सिख असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। केंद्र को सिखों की जानमाल की रक्षा के लिए यह मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाना चाहिए। केंद्र सरकार अफगानिस्तान के सिखों को भारत में बसाने की पहलकदमी करे। अफगानिस्तान के सिख यदि भारत आते हैं तो एसजीपीसी उनको पूरा सहयोग देगी। लौंगोवाल ने अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमले में मारे गए सिखों के परिजनों को एक-एक लाख और जख्मियों को 50-50 हजार रुपये की राशि देने की घोषणा की।
बीते तीन दशकों से अफगानी सिख कई बार पलायन कर भारत पहुंचे
पिछले तीन दशक के दौरान अफगानिस्तान में सिखों पर जितनी बार भी आतंकी हमले हुए है, तब-तब वहां से सिख बड़ी संख्या में पलायन कर अटारी रेलवे स्टेशन या अटारी सड़क सीमा के रास्ते भारत पहुंचे हैं। केंद्र सरकार द्वारा सीएए लागू करने के बाद अफगानिस्तान से पलायन कर आए सभी हिंदुओं व सिखों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी। हालांकि कोरोना वायरस के कारण अटारी-वाघा सड़क सीमा पर स्थित इंटरनेशनल गेट भी बंद कर दिए गए हैं। इसलिए अफगानी सिखों का भारत में शरण के लिए आना अभी कठिन लगता है। पलायन कर भारत आने वाले सिखों को एसजीपीसी पहले भी आर्थिक मदद देती रही है।