शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने डेरामुखी राम रहीम को तीन सप्ताह की फरलो देने पर एतराज जताया है। उन्होंने इसे केंद्र और हरियाणा सरकार की बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि इससे पंजाब के भाईचारे को नुकसान हो सकता है। धामी ने कहा कि एक तरफ पंजाब में चुनावी माहौल चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बरगाड़ी कांड की जांच में राम रहीम को शामिल किया जा रहा है। ऐसे में अचानक राम रहीम को 21 दिन की फरलो देना पंजाब के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
दूसरी तरफ हमारे कई लोग लंबे समय से जेलों में बंद हैं। उनकी पैरोल के आवेदन भी रद्द किए जा रहे हैं। राम रहीम को इस वक्त फरलो देने की इतनी क्या जल्दी थी। केंद्र और हरियाणा सरकार का यह फैसला अति निंदनीय है और पंजाब की भाईचारक सांझ को नुकसान पहुंचाने वाला है। एडवोकेट धामी ने कहा कि डेरा सिरसा मुखी, जहां दुष्कर्म और कत्ल जैसे संगीन मामलों में सजा काट रहा है, वहीं 2015 में बरगाड़ी में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से उसका सीधा संबंध है।
यह शख्स सिखों की धार्मिक भावनाओं का कातिल है और दुख की बात है कि हरियाणा और केंद्र की भाजपा सरकार इस मामले में राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के मौके पर भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए देश और विशेषकर पंजाब का माहौल खराब करने से गुरेज नहीं कर रही। एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि एक तरफ डेरामुखी से बेअदबी मामले में पूछताछ जारी है तो दूसरी तरफ उसे जेल से बाहर निकालकर राहत देने का रास्ता खोलना मंजूर नहीं है।
भाजपा पंजाब को शांत नहीं देखना चाहती, इसीलिए राम रहीम को बाहर लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिख भावनाएं इसे कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगी और इसका सख्त विरोध किया जाएगा। उन्होंने हरियाणा और केंद्र सरकार को अपनी गलती को सुधारने और सिखों से इस गलती की माफी मांगने को कहा है।