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Punjab: 'किसी भी धर्म की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ कोई फिल्मांकन न हो, सेंसर बोर्ड को करना चाहिए सुनिश्चित'

Wed, 30 Aug 2023 11:12 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

एसजीपीसी ने कहा कि फिल्मों में सिख विरोधी किरदारों को रोकने के प्रति सरकारें गंभीर नहीं हैं। 'यारियां-2'' के रिलीज हुए गाने में सिख भावनाओं के खिलाफ फिल्मांकन को लेकर सरकारों पर निशाना साधा है। 
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सेंसर बोर्ड - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने फिल्म ''यारियां-2'' के रिलीज हुए गाने में सिख भावनाओं के खिलाफ फिल्मांकन को लेकर सरकारों पर निशाना साधा है। ग्रेवाल ने कहा कि अक्सर फिल्मों में सिख नैतिकता, सिद्धांतों और जीवनशैली को ठेस पहुंचाने वाली हरकतें की जाती हैं। लेकिन केंद्र सरकार ऐसे गंभीर मामलों को लेकर गंभीर नहीं है।

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फिल्म सेंसर बोर्ड द्वारा कभी भी धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर फिल्में नहीं दिखाई जातीं। इसीलिए फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता ऐसे दुसाहसिक कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड को यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी धर्म की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ कोई फिल्मांकन न हो, लेकिन तमाम जानकारी के बावजूद यह जारी है।

ग्रेवाल ने कहा कि फिल्म यारियां-2 के गाने में जानबूझकर सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है और सरकारें अब तक चुप हैं। शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर फिल्म के गाने में सिख विरोधी कृत्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार से मांग है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रेवाल ने कहा कि फिल्म सेंसर बोर्ड में हर धर्म का एक प्रतिनिधि शामिल किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी धर्म की भावनाओं के खिलाफ कोई भी दृश्य सार्वजनिक न हो सके। एसजीपीसी इस मामले पर कई बार आम बैठकों के दौरान प्रस्ताव पारित कर सरकारों को भेज चुकी है। इसके बावजूद सरकारों ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी।

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