एसजीपीसी अमृतसर की कार्यकारिणी
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की ओर से दी गई धार्मिक सजा एसजीपीसी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल सहित सभी पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी सदस्यों ने भुगती। सभी ने गुरुद्वारा श्री सारागढ़ी से लेकर सचखंड तक के 800 मीटर रास्ते पर झाड़ूू लगाने की सेवा शुरू कर दी है। लौंगोवाल पूरी कार्यकारिणी के साथ सतनाम वाहेगुरु के जाप से यह सेवा तीन दिनों तक करेंगे।
पहले दिन बुधवार को सेवा के समापन के बाद लौंगोवाल ने कहा की श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के आदेश के अनुसार सेवा आरंभ की गई है। इस गंभीर मामले में कुछ लीग राजनीति कर रहे हैं हे। कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा की जत्थेदार अकाल तख्त ने उन्हें इस मामले में तलब नहीं किया था। उन्होंने अपनी जमीर की आवाज पर मामले का पश्चाताप करने के लिए खुद अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हो कर गुहार लगाई थी।
लौंगोवाल ने एसजीपीसी परिसर में धरना दे रहे सिख संगठनों को संघर्ष खत्म करने का आग्रह भी किया। इससे से पूर्व जत्थेदार के आदेशानुसार एसजीपीसी की कार्यकारिणी की ओर से गुरु रामसर साहिब में रखे गए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए। सचखंड श्री हरिमंदर साहिब के हजूरी रागी जत्थे भाई राये सिंह ने गुरुबाणी कीर्तन कर संगत को गुरु चरणों के साथ जोड़ा। अरदास भाई सुल्तान सिंह ने की।
धार्मिक सजा के दूसरे पड़ाव के अनुसार एसजीपीसी ने श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ करवाया। इसके भोग 9 अक्तूबर को डाले जाएंगे। झाड़ूू की सेवा में भाग लेने वालों में एसजीपीसी के सीनियर उपाध्यक्ष रजिंदर सिंह मेहता, जूनियर उपाध्यक्ष गुरबक्श सिंह खासला, महासचिव हरजिंदर सिंह धामी व कार्यकारिणी के सभी 11 सदस्य मौजूद थे। एसजीपीसी के इतिहास में दो दशक के बाद यह पहली बार है कि कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को झाड़ूू लगाने की सेवा लगाई गई है।
क्या था मामला
गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब स्थित पब्लिकेशन विभाग में 19 मई 2016 को शार्ट सर्किट से लगी आग के कारण श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की हुई बेअदबी के आरोपों से मुक्त होने के लिए लौंगोवाल सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य बीते महीने आयोजित पांच सिंह साहिब के बैठक में उपस्थित हुए थे। जत्थेदार ने श्री अकाल तख्त साहिब की ड्योढ़ी से खड़े होकर धामिर्क सजा की घोषणा की थी।