शिअद (बादल) के बागी एसजीपीसी सदस्य सेवा सिंह सेखवां ने कहा कि लापता पावन स्वरूपों के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की ओर से गठित की गई एडवोकेट ईशर सिंह जांच कमेटी की रिपोर्ट अधूरी है। जांच कमेटी यह पता लगाने में असमर्थ रही कि लापता पावन स्वरूप कहां और किस हालत में हैं। शिअद (डेमोक्रेटिक) जांच कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। इस मामले में बादल परिवार भी आरोपी है। वह लापता पवन स्वरूपों के मामले के आरोपियों को कड़ी सजा देने के लिए जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।
सेखवां के अनुसार लापता पावन स्वरूपों के मामले में एसजीपीसी की भूमिका पंथक परंपराओं व मर्यादाओं के अनुसार नहीं है। एसजीपीसी कभी आरोपियों को कानूनी कटघरे में खड़ा करने के दावे करती है तो कभी उन्हें पंथक परंपराओं के अनुसार सजा देने के लिए जत्थेदार से गुहार लगा रही है। गोबिंद सिंह लौंगोवाल दावा कर रहे हैं कि पावन स्वरूपों की कोई बेअदबी नहीं हुई है लेकिन तस्वीरें सच्चाई बयान कर रही हैं। जिन्होंने पावन स्वरूपों की बेअदबी की है उन्हें सिख धर्म में रहने का अधिकार नहीं है। इस पर जत्थेदार को सोचना चाहिए।