गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) से साइकोलॉजी व सिख धर्म अध्ययन विभाग से ‘मास्टर’ की डिग्री प्राप्त करने वाला हरमीत सिंह हैप्पी उर्फ पीएचडी को धार्मिक कट्टरवाद ने आतंक की तरफ धकेल दिया। मास्टर डिग्रियां प्राप्त करने के बाद हैप्पी ने पीएचडी के साथ-साथ यूजीसी की भी परीक्षा पास की हुई थी।
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद हैप्पी खालिस्तानी आतंकवादियों के संपर्क में आकर मुख्य धारा से भटक गया। खालिस्तानियों ने हैप्पी को हथियार चलने की ट्रेनिंग दी। पंजाब में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व हिंदू नेताओं की हत्या में खालिस्तानी आतंकवादियों ने हैप्पी को मोहरा बनाया।
हैप्पी के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को सबसे पहले उस समय जानकारी मिली जब अमृतसर के कस्बा राजा सांसी के गावं में स्थित एक निरंकारी भवन में हुए बंब ब्लास्ट के आरोप में दो आरोपियों का गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए बिक्रम सिंह व अवतार सिंह ने पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसी को जानकारी दी थी की इस मामले का मास्टर माइंड हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी है। इस ब्लास्ट में तीन लोगों मारे गए थे।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में पत्रकार सम्मेलन में हरप्रीत हैप्पी का उल्लेख करते हुए कहा था की आईएसआई उसे मोहरा बनाए हुए है। सुरक्षा एजेंसियों को हैप्पी के पाकिस्तान में शरण लेने की सुचना दो वर्ष पहले ही मिली थी। वर्ष 2019 में सुरक्षा एजेंसियों ने हैप्पी सहित खालिस्तानियों के विरुद्ध इंटरपोल की मदद से एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था। हैप्पी हिंदू व आरएसएस नेताओं की हत्याओं में शामिल था।