1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान जिस तरह हमारे जवानों ने पाक सेना को धूल चटाई उसी तरह पठानकोट एयरबेस में आतंकियों द्वारा किए हमले में सेना ने एकजुट होकर उनके नापाक इरादों को ध्वस्त कर दिया।
भारतीय सेना हर देश के भीतर या फिर सरहद पार से किसी आपातकाल स्थिति में आतंकियों व दुश्मनों को मोहतोड़ जवाब देने के लिए हर समय तत्पर है।
यह बात वीरवार को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में वर्ष 1965 भारत-पाक युद्ध की जीत की 50वीं वर्षगांठ के दौरान आयोजित की गई एक संगोष्ठी में (पीवीएसएम) और (एवीएसएम) लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि 1965 के युद्ध दौरान सेना में पंजाबी फौजियों ने अहम भूमिका निभाई थी।
जिन जवानों ने 1965 के युद्ध में शहादत हासिल की उनकी कुर्बानियों पर भारतीय सेना को गर्व है। युद्ध के हिस्सा रहे उन जवानों को वीरवार पुरस्कार भी भेंट किए।
1965 के हथियारों की लगी प्रदर्शनी
1965 के युद्ध दौरान सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किए हथियारों की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी को देखने के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्रों ने खास रुचि दिखाई।
इन हथियारों में पिस्टल 9 एमएम, दूरबीन, टेलीफोन एक्सचेंज, लाइट ग्रेनेड लांचर, पानी की बोतल, हेलमेट थे। इसके अलावा युद्ध दौरान पाकिस्तान सेना से जब्त किए गए बैच, रिबन, मेडल भी प्रदर्शनी दौरान दिखाए गए।