शहीदों की जन्मस्थली जिला पठानकोट के वीर भूमि ने अपनी गौरवमयी परंपरा को
बरकरार रखते हुए अपना एक और जांबाज मंजीत सिंह निवासी अखवाना को राष्ट्र की
बलिवेदी पर खुद को कुर्बान कर दिया।
मंजीत सिंह गत दिवस मणीपुर के चंदेल
जिले में सेना के काफिले पर किये हमले में अपने 19 साथियों सहित शहादत का
जाम पी गया।
जब मंजीत सिंह के परिवार को उसके शहीद होने की सूचना मिली
तो वह दुख से भर उठे। माता तृप्ता को इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ। मंजीत
सिंह की डेढ़ वर्ष पहले काजल गुलेरिया से शादी हुई थी। पति की शहादत का
समाचार सुनकर वह बेसुध हो गई। वहीं गम के सागर में डूबे शहीद के पिता ठाकुर
शाम सिंह ने बताया कि उसका 27 वर्षीय बेटा मंजीत दिसंबर 2007 को सेना की 6
डोगरा यूनिट में भर्ती हुआ था। उसकी यूनिट का तबादला चंडीगढ़ हो गया था।
वह
दो दिन बाद ही छुट्टी पर आने वाला था। उसने दो दिन पहले फोन पर कहा था कि
वह घर आकर अपनी बहन शिवानी की शादी तय कर उसे बिदा करेगा। उन्होंने बताया
कि उसका छोटा बेटा संदीप सिंह भी सेना में है। उन्होंने कहा कि मुझे अपने
बेटे की शहादत पर गर्व है।
इस अवसर पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के
महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की व संरक्षक एनपी सिंह ने शहीद परिवार
का दुख बांटा। वहीं उन्होंने केन्द्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि यदि
सरकार ने आतंकवादियों का फन कुचलने के लिए कोई ठोस रणनीति न बनाई तो इस
प्रकार शुरवीरों की शहादत का सिलसिला जारी रहेगा।