अकाली दल हमेशा जलालाबाद को अपनी सुरक्षित सीट मानता रहा है, लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रमिंदर आंवला ने अकाली दल के प्रत्याशी राज सिंह डिब्बीपुरा को हराकर अकाली दल का जलालाबाद से बारह साल का रिश्ता तोड़ दिया है।
जानकारों का कहना है कि अकाली दल का जलालाबाद से हार का कारण कई गांव ऐसे हैं जहां पर विकास तक नहीं हुआ है, ग्रामीणों का यही गुस्सा अकाली दल का हार का कारण बना है।
सियासी जानकारों का कहना है कि अकाली दल से सांसद रह चुके शेर सिंह घुबाया ने जलालाबाद का गांव ढंढी कदीम को गोद लिया था और उक्त गांव में सभी मूलभूत सुविधाएं देने का वादा किया था लेकिन इस गांव में कोई विकास कार्य नहीं करवाया गया।
खुद सांसद शेर सिंह गांव में सिर्फ दो बार गए थे। ऐसे जलालाबाद के कई गांव हैं जहां अकालियों ने विकास नहीं करवाया। इसलिए जनता अकाली दल से नाराज थी। खुद सुखबीर का जलालाबाद आना-जाना कम था। इसके अलावा स्थानीय नेता भी आम जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे थे।
जानकारों का कहना है कि कांग्रेस प्रत्याशी रमिंदर आंवला ने उपचुनाव से पहले जनता से जो वादे किए थे, यदि वो पूरे कर देते हैं तो शिअद (ब) के अध्यक्ष सुखबीर बादल विधानसभा चुनाव जलालाबाद से नहीं लड़ेंगे।
उपचुनाव में सुखबीर ने जलालाबाद की जनता से हर चुनावी रैली और सभा में यही कहा था कि डिब्बीपुरा नहीं मैं चुनाव लड़ रहा हूं, मुझे वोट देकर विजयी बनाओ। बारह साल के राज में जलालाबाद के कई ऐसे गांव हैं, जो विकास कार्य से वंचित थे, उनकी तरफ अकाली दल ने ध्यान नहीं दिया था। यही कारण अकाली दल की हार का बताया जा रहा है।