अमृतसर। बरगाड़ी में 2015 में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी मामले में पेश किए चालान में एसआईटी की ओर से डेरा सिरसा मुखी गुरमीत राम रहीम का नाम बाहर निकालने का विरोध करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों ने पंजाब की कैप्टन सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
कमेटी के उप प्रधान सुरजीत सिंह भिट्टेवड्ड, जूनियर उप प्रधान बाबा बूटा सिंह, महासचिव एडवोकेट भगवंत सिंह सियालका और कमेटी के मुख्य सचिव एडवोकेट हरजिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार डेरा सिरसा मुखी को बचाने का प्रयास न करे। पंजाब सरकार की नई एसआईटी भी कैप्टन सरकार का एजेंडा लागू करना चाहती है। यही कारण है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए ही अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि डेरा सिरसा मुखी गुरमीत राम रहीम को एफआइआर 128 के तहत अदालत में पेश किए गए चालान से बाहर रखना हैरान करने के साथ-साथ पक्षपातपूर्ण है। बेअदबी मामलों में गिरफ्तार डेरा प्रेमियों के बयान पर गुरमीत राम रहीम का नाम एफआईआर में शामिल किया गया था, लेकिन चालान पेश करने के वक्त उसे बचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने पंजाब सरकार को बेअदबी के मामलों में सियासत न करने की सलाह देते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी जांच पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। बता दें कि डेरा मुखी को बचाने का आरोप लगाते हुए शिरोमणि कमेटी की प्रधान बीबी जागीर कौर ने भी एसआईटी पर सवाल उठाएं हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार को अपना राजनीतिक मकसद सिद्ध करने से बाज आना चाहिए। इसके अलावा श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी बेअदबी मामलों पर राजनीति न करने और इसके दोषियों को सजा देने की बात कही थी।