पर्ल्स वर्कर और कस्टमर यूनियन की ओर से शुक्रवार को पर्ल्स कार्यालय सामने
इकट्ठे होकर हक सच की लड़ाई को जारी रखते धरना-प्रदर्शन किया गया।
इस
दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन ग्राहकों की राशि दिलवाने की मांग की, जिनकी
पॉलिसियों का समय बीते 2 वर्षों से पूरा हो चुका है। यूनियन के नेता ने कहा
कि कंपनी की मैनेजमेंट अपने खाते बंद होने का बहाना लगाकर लोगों को गुमराह
करना बंद कर दे।
यूनियन के नेता ने बताया कि पर्ल्स ने अब एक नई
कंपनी मैस्मरिक और लोडस सोसाइटी के नाम पर इसका दफ्तर मॉडल टाउन बठिंडा में
खोल लोगों से पैसे इकट्ठे करने का काम जारी किया हुआ है, वहीं पर्ल्स
कंपनी का ही एक विंग है। लोगों ने इस कंपनी को बंद करने की मांग की है। साथ
ही कंपनी को सील कर पर्ल्स कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू और इसके साथ
संबंधित अलग-अलग डायरेक्टरों पर पर्चा दर्ज करने की मांग की है।
सुप्रीम
कोर्ट और सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज प्रोग्राम इंडिया (सेबी) की ओर से 21
अगस्त 2014 को अपना बिजनेस बंद कर लोगों की पेमेंट वापस करने को 3 माह का
समय दिया था। वहीं लगभग 1 वर्ष बीतने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के
अनुसार निवेशकों को अपनी पेमेंट वापस नहीं मिली तथा लोगों को दफ्तर के
चक्कर काटने पर रहे हैं। इस कंपनी के पूरे देश में लगभग 6 करोड़ खाता धारक
और लगभग 60 लाख वर्कर हैं।
जिन गरीब लोगों ने अपनी कमाई इस कंपनी
में लगाई है वे अपने पैसों की वसूली के लिए ठोकरें खा रहे हैं। ग्राहकों और
वर्करों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग है कि कंपनी मालिक निर्मल सिंह
भंगू और इसके अन्य डायरेक्टरों को काबू कर गरीब लोगों के पैसे वापस करवाए
जाएं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में निवेशकों का कोई
जानी माली नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेवारी पीएसीएल मैनेजमेंट और
प्रशासन की होगी। इस दौरान महिंद्रपाल सिंह, कुलवंत सिंह, रणजीत सिंह,
सुखविंद्र सिंह बरनाला, कर्मजीत सिंह बरनाला, डॉ. गुरनाम सिंह मानसा, दर्शन
सिंह बरेटा (संगरूर), गुरजंट सिंह, साधू सिंह, बलजीत सिंह डबवाली, बलवंत
सिंह रामपुरा, विक्रम शर्मा, बलदेव प्रेमी, हरविंद्र प्रेमी और प्रीतम सिंह
तलवंडी मौजूद थे।