अमृतसर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी सुरिंदरपाल सिंह छीना को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करने के आरोप में सोमवार को न्यायाधीश नवजोत सोहल की अदालत में दोषी करार दे दिया गया।
छीना को 23 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। वहीं उनकी पत्नी अपजीत कौर को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप से बरी कर दिया है।
छीना 1996 से 2002 तक बैंक के एमडी रहे है और इसी समय दौरान उनकी तरफ से कई प्रकार के घोटाले किए गए। इसका खुलासा होने पर छीना पर केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था।
दोषी करार दिए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो के पास शिकायतें पहुंचने पर जांच शुरु की गई और 2002 में थाना कोतवाली पुलिस ने छीना के खिलाफ केस दर्ज किया था। वहीं राज्य सरकार की ओर से भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त नोटिस लिया था।
आरोप था कि सुरिंदरपाल सिंह छीना ने एमडी पद पर रहते हुए बैंक में भर्ती के लिए आठ अकाउंट, 14 डाटा एंट्री क्लर्क और 50 चौकीदार व चपरासी के पदों के लिए नौकरियां निकाली थी। इन पदों पर उन्होंने पैसे लेकर भर्तियां की थी। भर्ती के लिए उन्होंने बाकायदा रेट तय कर रखे थे।
यह भी आरोप लगाए थे कि क्लर्क की भर्ती करने के लिए 1 लाख रुपये और चपरासी की भर्ती के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर लिए जाते थे। इसमें करीब 15 लोग सामने आए, जिन्होंने कोर्ट में एफीडेविट देकर पैसे दिए जाने की बात कही है कि छीना ने उन सभी के पास से कुल 13.25 हजार रुपये लिए है।
छीना ने कार्यकाल दौरान 15 जनरेटर खरीदे गए। जनरेटर का मार्केट रेट 12 हजार रुपये था। जबकि छीना ने सरकारी बिल में 30 हजार रुपये दर्शाए और एक जनरेटर पर 18 हजार रुपये अपनी जेब में डाल लिए। छीना ने 1996 से 2002 के कार्यकाल दौरान चार बैंकों को बदल को अन्य इमारतों में शिफ्ट करवा दिया।
जहां पहले केवल 2000 रुपये महीना रेंट पर बैंक की इमारत ली गई थी। उसकी जगह पर 15 से 20 हजार रुपये महीना रेंट पर इमारत ली गई और इसमें भी भारी भरकम कमीशन लेते थे। आरोप यह भी है कि बैंक के कामों के लिए पांच गाड़ियां मिली थी। इनमें से चार अक्सर छीना के घर पर लगी रहती थी और वह इनका प्रयोग अपने निजी कामों के लिए करते थे।