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समानांतर जत्थेदार ने ज्ञानी इकबाल सिंह को पंथ से किया निष्कासित

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श्री अकाल तख्त के समानांतर कार्यवाहक जत्थेदार ध्यान सिंह मंड तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह को सिख पंथ से निष्काषित कर दिया है। 2015 में बेअदबी की घटनाओं पर चर्चा के लिए बुलाए गए सरबत खालसा द्वारा मनोनीत श्री अकाल तख्त के समानांतर कार्यवाहक जत्थेदार ध्यान सिंह मंड ने पंज प्यारों के साथ एक बैठक के बाद यह घोषणा की।
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वहीं ऐसा आदेश देकर समांतर जत्थेदार ज्ञानी ध्यान सिंह मंड ने खुद श्री अकाल तख्त की मर्यादाओं और परंपराओं का उल्लंघन कर दिया। किसी भी सिख को पंथ से निष्कासित करने का अधिकार सिर्फ एसजीपीसी द्वारा बनाए गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार नियुक्त जत्थेदार श्री अकाल तख्त के पास ही है। जत्थेदार श्री अकाल तख्त जब भी किसी को पंथ से निष्कासित करते हैं, तो उसकी चर्चा पांच सिंह साहिबान की बैठक में की जाती है। इस बैठक में अन्य तख्तों के जत्थेदार सहित श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी का शामिल होना भी जरूरी है। पांच सिंह साहिबान की बैठक में जब किसी को पंथ निष्कासित करने का अंतिम फैसला होता है, तब जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब की ड्योढ़ी में खड़े होते हैं। उनके साथ बैठक में शामिल सभी जत्थेदार और मुख्य ग्रंथी भी ड्योढ़ी में मौजूद रहते हैं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हाजिरी में जत्थेदार घोषण करते हैं। जत्थेदार मंड ने इनमें से किसी मर्यादा का पालन नहीं किया। मंड ने पांच प्यारों के साथ बैठक भी मर्यादाओं के अनुसार श्री अकाल तख्त के भीतर नहीं की और न उन्हें यह अधिकार था।
ज्ञानी मंड ने पांच अगस्त को ज्ञानी इकबाल सिंह को सिखों को भगवान श्रीराम के बेटों लव-कुश के वंशज के बयान देने पर स्पष्टीकरण देने के लिए 20 अगस्त को श्री अकाल तख्त में तलब किया गया था। कोई भी जवाब न देने के बाद वीरवार दोपहर उन्हें सिख पंथ से निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए।
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ज्ञानी मंड ने आदेश दिए कि ज्ञानी इकबाल सिंह अपने नाम के साथ सिंह, ज्ञानी और जत्थेदार शब्दों का प्रयोग न करें। सिख संगत को आदेश दिए गए कि इकबाल सिंह के साथ कोई भी सांझ न रखी जाए और न ही सहयोग किया जाए। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को मानने वाली संगत इकबाल सिंह के साथ रोटी-बेटी की सांझ न करे।
मंड ने दावा किया कि इस पावन अस्थान पर पंथक सिद्धांतों व मर्यादाओं के अनुसार पांच सिंह साहिबान ने गुरमत्ता (धार्मिक प्रस्ताव) पारित किया है। इकबाल सिंह अपना नया नामकरण कर किसी भी कौम में शामिल हो सकते हैं। पत्रकारों से बातचीत में ज्ञानी ध्यान सिंह मंड ने पूर्व जत्थेदार को कई बार इकबाल कह कर संबोधित किया।
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