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सीएम मान की बढ़ी मुश्किलें: आज मुख्यमंत्री के खिलाफ पंथक सम्मेलन, एसजीपीसी तय करेगी आगामी रणनीति

Sun, 05 Jul 2026 07:00 AM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर

सार

पंथक सम्मेलन से पहले ही कई सिख संगठनों ने इससे दूरी बना ली है। दमदमी टकसाल के मुख्य गुट और संत समाज ने फिलहाल सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
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सीएम मान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के इस्तीफे की मांग पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अपने रुख पर कायम है। इसी मुद्दे पर रविवार को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल में पंथक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में विभिन्न सिख जत्थेबंदियों, धार्मिक संस्थाओं, संत-महापुरुषों, बुद्धिजीवियों और बड़ी संख्या में संगत को आमंत्रित किया गया है।
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एसजीपीसी के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के समर्थन में पंथक एकजुटता का संदेश देना और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के खिलाफ आगे की रणनीति तय करना है। बैठक में जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधित एक्ट पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही भविष्य में धार्मिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया जाएगा।

सम्मेलन में श्री अकाल तख्त के हालिया फैसलों के समर्थन का प्रस्ताव भी लाया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री को सामाजिक स्तर पर समर्थन नहीं देने की अपील, प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाने और जिला स्तर पर पंथक बैठकों के आयोजन की रूपरेखा पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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एसजीपीसी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसका एक शिष्टमंडल पंजाब के पुलिस महानिदेशक से मिलकर संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग करेगा। कमेटी का कहना है कि पूरे मामले को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि कानूनी स्तर पर भी मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।

एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त का आरोप है कि संशोधित एक्ट लागू करने से पहले पंजाब सरकार ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया। इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को श्री अकाल तख्त में तलब किया गया था। बाद में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्रियों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया। श्री अकाल तख्त ने सरकार को एक्ट में सुझाए गए संशोधन शामिल करने के लिए एक माह का समय दिया है।सम्मेलन को लेकर धार्मिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि यहां लिए जाने वाले फैसले आगे इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।

सम्मेलन से पहले ही मतभेद, कई संगठनों ने बनाई दूरी
पंथक सम्मेलन से पहले ही कई सिख संगठनों ने इससे दूरी बना ली है। दमदमी टकसाल के मुख्य गुट और संत समाज ने फिलहाल सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, एसजीपीसी ने देर रात तक दोनों पक्षों को मनाने की कोशिश की और टकसाल प्रमुख बाबा हरनाम सिंह खालसा से संपर्क के लिए प्रतिनिधि भी भेजे लेकिन समाचार लिखे जाने तक सहमति नहीं बन सकी।

सिख फेडरेशन भिंडरांवाला समेत कुछ संगठनों का आरोप है कि सम्मेलन का इस्तेमाल शिरोमणि अकाली दल की राजनीति को पुनर्जीवित करने के लिए किया जा रहा है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) के मुख्य प्रवक्ता जगजीत सिंह कोहली ने दावा किया कि उनकी पार्टी को सम्मेलन का निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से जवाब मांगना अकाल तख्त का अधिकार है, लेकिन सिख विधायकों और मंत्रियों को तलब किए जाने से मामला धार्मिक से अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है।
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