17 दिसंबर की रात युद्ध खत्म हुआ। 18 की सुबह भारतीय सेना ने पूरे इलाके की तलाशी लेनी शुरू कर दी। इस दौरान भारतीय सैनिकों को कर्नल रजा का गोलियों से छलनी शरीर मिला। उन्होंने हाथ में हथियार पकड़े हुए थे। कर्नल एरी उस जगह पहुंचे और रजा को सैल्यूट किया। रजा का शव पाकिस्तान को वापस करने के साथ कर्नल एरी ने एक पत्र भी सौंपा।
इसमें कर्नल रजा द्वारा युद्ध के दौरान दिखाई गई वीरता का वर्णन था। यह पत्र पढ़कर पाकिस्तान सरकार ने कर्नल रजा को मरणोपरांत निशान-ए-हैदर के सम्मान से नवाजा था। कर्नल एरी द्वारा लिखा पत्र आज भी पाकिस्तान की इस बटालियन के मुख्यालय में रखा है।
48 साल से संभाल रखा है ‘जरपाल क्वीन’ को :
थ्री ग्रेनेडियर बटालियन में मेजर पद पर सेवाएं निभा चुके मेजर आरएस गिल ने बताया कि जिस जीप को पाकिस्तानी सेना छोड़ गई थी, वह जीप आज भी इस बटालियन के पास एक धरोहर के रूप में है। इस जीप को ‘जरपाल क्वीन’ कहा जाता है। युद्ध को बीते 48 वर्ष हो चुके है, लेकिन पाकिस्तान की यह जीप आज भी पेट्रोलिंग के काम आती है।