मेडिकल शिक्षा विभाग में ठेका प्रणाली के तहत काम करने वाली स्टाफ नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के कर्मचारियों का आंदोलन दिन प्रतिदिन तेज होता जा रहा है। रविवार को शहर में प्रदर्शनकारी सुबह ही कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी की कोठी के बाहर मेडिकल इनक्लेव में जाकर धरने पर बैठ गए।
इस दौरान कर्मचारियों ने लाउड स्पीकर लगा कर जोशी और पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और खाली थालियां बजा कर रोष प्रकट किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जोशी की रिहाइश के बाहर से उठाने की काफी कोशिश की। लेकिन जब सभी कोशिशें नाकाम हो गई, तो जोशी के समर्थकों ने प्रदर्शनकारियों को कहा कि वह जोशी के कार्यालय पहुंचे, वहां उनके साथ बातचीत की जाएगी। जब कर्मचारी धरना उठा कर जोशी के कार्यालय पहुंचे, तो जोशी ने उनकी मांगों पर कोई सार्थक जवाब देने की बजाए कहा कि वह कोई प्रदर्शनकारियों का वकील नहीं है बल्कि पंजाब सरकार का एक कैबिनेट मंत्री है।
वहीं, मरण व्रत पर बैठी कर्मचारी नेता कर्मजीत कौर की हालत भी बिगड़नी शुरू हो गई है। एससी आयोग के उपचेयरमैन डॉ. राज कुमार कर्मजीत कौर का हाल चाल पूछने गए। रविवार को आंदोलनकारियों के समर्थन में नर्सिंग एसोसिएशन पंजाब की नेता राज बेदी और कर्मचारी फ्रंट के नेता जर्मनजीत सिंह भी पहुंच गए। प्रदर्शकारियों की उपाध्यक्ष अमन दीप कौर सहोता और सतिंदर पाल सिंह ने बताया कि कांटेक्ट बेसिस नर्सिंग और पैरा मेडिकल एसोसिएशन के कर्मचारी जो पिछले कई वर्षों से ठेका प्रणाली के तहत अमृतसर ,लुधियाना और फरीदकोट के अलग अलग अस्पतालों में मेडिकल शिक्षा विभाग के तहत काम कर रहे है।
25 फरवरी को संगठन की राज्य अध्यक्ष करमजीत कौर औलख अनशन पर पटियाला में बैठी हुई थी। वीरवार पटियाला से अनशन कैंप अमृतसर में अनिल जोशी के कार्यालय के बाहर लगा दिया है। उनकी मांग है कि पंजाब के मुख्यमंत्री की ओर से कि ए वादों के अनुसार तीन वर्षों का सेवा काल पूरा कर चुके कर्मचारियों को पक्का किया जाए। बाकी कर्मचारियों की भी सेवाएं रेगुलर की जाए जिनके अभी तीन वर्ष पूरे नहीं हुए है। सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन ग्रेड दिया जाए। उन्होंने बताया कि अमृतसर और अलग अलग जिलों के कर्मचारी जो अन्य जिलों में तैनात है उनको भी एक से दूसरी जगह बदली करने के लिए मंत्री के निकटवर्ती मोटी रिश्वतें कथित तौर पर लेकर तबादले कर रहे है। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे विभागों के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जा सकता है तो मेडिकल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को क्यों नहीं किया जा रहा है।