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नशे का दंश: किसी के बुढ़ापे का सहारा छिना, किसी का उजड़ा सिंदूर, अपनों को खोने वालों का सवाल-कब लगेगी नशे पर लगाम  

Sat, 23 Apr 2022 10:49 AM IST
निवेदिता वर्मा रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

गुमटाला सहित शहर के कई अन्य हिस्सों में भी स्मैक, अफीम, चरस, शराब, हेरोइन, नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल का धंधा खूब फलफूल रहा है। सवाल यह है कि नशे की इस बीमारी से आखिर पीछा कैसे छूटेगा। इसकी कोई ठोस पहल किसी की ओर से भी होती दिखाई नहीं देती। 
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अमृतसर में नशे ने लील ली कई युवाओं की जिंदगी। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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गुरुनगरी अमृतसर ने नशे का दंश भी झेला है। कितने ही परिवार इसके कारण उजड़ गए। किसी का बुढ़ापे का सहारा छिन गया तो किसी बहन का भाई। मासूम बच्चे यतीम हो गए। जितने परिवार उतनी ही दर्दनाक कहानियां। सबके अपने अपने दर्द। सवाल यह है कि नशे की इस बीमारी से आखिर पीछा कैसे छूटेगा। इसकी कोई ठोस पहल किसी की ओर से भी होती दिखाई नहीं देती। 

23 साल का सूरज चढ़ गया नशे की भेंट

ढाई माह पूर्व अमृतसर के गुमटाला इलाका में 23 वर्षीय सूरज की नशे की ओवरडोज से मौत हो गई। परिवार का एक मात्र कमाई करने वाला दो बहनों, मानसिक रूप से कमजोर एक भाई और अपने बुजुर्ग माता का बेटा न जाने कब नशे के दलदल में फंसता चला गया, परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सूरज की माता राजवीर कौर ने बताया कि उनका पति काम तो करता है मगर अपनी शराब के लिए। एक बेटा बिल्कुल सीधा है, जिसे इस दुनिया के बारे में कुछ पता नहीं। उनके घर का एक मात्र कमाने वाला बेटा सूरज नशे के सौदागरों के जाल में फंस गया था। मेहनत मजदूरी से घर चलाता था। उसकी मौत के बाद परिवार की खुशियां काफूर हो गईं। गुमटाला में गली-गली, नुक्कड़ों पर नशा बिक रहा है। 

नशे की पूर्ति के लिए चुनी चोरी की राह

गुमटाला सहित शहर के कई अन्य हिस्सों में भी स्मैक, अफीम, चरस, शराब, हेरोइन, नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल का धंधा खूब फलफूल रहा है। अमर उजाला ने नशे के चंगुल में फंसे युवाओं के परिजनों से बात की। गुमटाला गांव की राजबीर कौर ने बताया कि उसके पति की पहले मौत हो चुकी है और ससुर बहुत ज्यादा बुजुर्ग है। उनका देवर तस्वीर सिंह पहले मेहनत-मजदूरी करता था, लेकिन गलत संगत में पड़कर वह नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल का सेवन करने लगा। इससे उसका काम धंधा छूट गया। नशे की लत पूरी करने के लिए वह घर में ही चोरी भी करने लगा। पांच दिन पहले ही उनके देवर की नशे से मौत हो गई। 

अब कोठियों में काम से ही चल रही घर की रोजी-रोटी

गुमटाला की सविंदर कौर ने बताया कि सात माह पहले उनका लड़का कुलविंदर सिंह बंटी नशे की ओवरडोज से उन्हें अकेला छोड़ कर चला गया। क्योंकि उनके पास कोई जमीन नहीं थी तो वह मेहनत मजदूरी करता था। उसी से परिवार पलता था। लेकिन नशे की लत लगने के बाद परिवार का सबकुछ बिखर गया। सात माह पहले हुई उसकी मौत के बाद तो उन्हें कोठियों मे काम का ही सहारा रह गया है। वे अकेली नहीं बल्कि कई अन्य इसी तरह के मामलों की पीड़ित महिलाएं भी कोठियों में बर्तन साफ करने और सफाई करने और कपड़े धोने आदि के काम करके परिवार का भरण पोषण करती हैं। 

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