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जत्थेदार गड़गज्ज का मरियम को पत्र: 'लाहौर में सिख विरासत स्थल को बचाएं', निर्माण और बदलाव पर रोक की मांग

Thu, 24 Sep 2026 01:24 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, अमृतसर

सार

लाहौर सिख विरासत स्थल: लाहौर के सिख विरासत स्थल पर निर्माण की आशंका के बीच जत्थेदार गड़गज्ज ने पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज को पत्र लिखा है। पत्र में गुरु अर्जन देव जी की शहादत से जुड़े लाल खूह-कट्टरी चंदू स्थल की सरकारी जांच कराने को कहा है।
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जत्थेदार ने मरियम नवाज को लिखा पत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लाहौर के अंदरूनी शहर में श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत से जुड़े लाल खूह-कट्टरी चंदू स्थल के आसपास निर्माण या अन्य बदलाव की आशंका के बीच श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पाकिस्तान पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ को पत्र लिखा है। 
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उन्होंने स्थल की मौजूदा स्थिति की सरकारी स्तर पर जांच कराने और जांच पूरी होने तक किसी भी निर्माण या बदलाव पर रोक लगाने पर विचार करने की मांग की है।

जत्थेदार ने पत्र की प्रति पाकिस्तान पंजाब के प्रांतीय मंत्री और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा को भी भेजी है। उन्होंने कहा कि पत्र का उद्देश्य किसी सरकार, संस्था या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि लाहौर में मौजूद सिख इतिहास की साझा विरासत की स्थिति की आधिकारिक जांच कराना है।

जत्थेदार के अनुसार सिख संगत की ओर से लाल खूह-कट्टरी चंदू स्थल की स्थिति को लेकर चिंता श्री अकाल तख्त साहिब के संज्ञान में लाई गई है। उन्होंने कहा कि आशंका के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय सरकार मौके की स्थिति और उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों की जांच कराए।

पुरातत्व विशेषज्ञों से जांच का सुझाव
पत्र में वाल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी, पुरातत्व विभाग और संबंधित विशेषज्ञों के माध्यम से स्थल की ऐतिहासिक एवं विरासती अहमियत का आकलन कराने का सुझाव दिया गया है। जांच में सिख इतिहास के विशेषज्ञों और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग भी की गई है।

 

लाहौर में सिख विरासत का हो सर्वे
जत्थेदार गड़गज्ज ने लाहौर के अंदरूनी शहर में सिख इतिहास से जुड़े प्रमुख स्थलों का व्यापक विरासत सर्वेक्षण कराने का सुझाव दिया है। इसमें प्रत्येक स्थल की मौजूदा स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, मालिकाना हक और कानूनी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने की बात कही गई है।
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उन्होंने कहा कि शहरी विकास, 1947 के विभाजन और समय के साथ बदली परिस्थितियों के कारण कई ऐतिहासिक निशानियां खत्म हो चुकी हैं या अपने मूल स्वरूप में नहीं बची हैं। ऐसे में मौजूद विरासत का दस्तावेजीकरण और संरक्षण जरूरी है।
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