-मानसून सत्र के दौरान सरकार करने जा रही है बिजली विभाग का पूर्ण निजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी बिजली विभाग के निजीकरण खिलाफ 14 जुलाई से राज्य व्यापी आंदोलन शुरू करेगी। राज्य भर में बिजली विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन व रैलियां की जा जाएंगी। सरकारी को किसी भी कीमत पर बिजली विभाग का निजीकरण नहीं करने दिया जाएगा। यह फैसला संगठन की कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और रणजीत सिंह कलेर बाला ने कहा कि 1948 के विद्युत अधिनियम में आम उपभोक्ताओं से केवल तीन प्रतिशत लाभ कमाने की बात कही गई थी, इसलिए सभी दलों की ओर से एक समान नीति के साथ लाए गए विद्युत अधिनियम 2003 के तहत निजी कंपनियों को कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा और बिजली पैदा करने के अधिकार भी निजी कंपनियों को दे दिए गए, जिस नीति के तहत पंजाब में निजी कंपनियों के थर्मल प्लांट लगे हैं और सरकार महंगी दरों पर बिजली खरीद कर अप्रत्यक्ष रूप से लोगों के टैक्स के पैसे की लूट कर रही है।
किसान नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार यह कहकर आई थी कि बिजली खरीद समझौते रद्द किए जाएंगे, लेकिन समझौते रद्द करना तो दूर की बात है, बल्कि सरकार 2020 से लाए जा रहे कानूनों को लागू करके बिजली बोर्ड को पूरी तरह से निजी कंपनियों को बेचने की लगातार कोशिश कर रही है। पूरे देश और पंजाब के किसान, मजदूर, दुकानदार और आम जनता इस नीति का लगातार विरोध कर रही है। पिछली मोदी सरकार की ओर से लाया गया बिजली संशोधन विधेयक संसदीय स्थायी समिति के पास चला गया था, 2019-24 का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह 2023 का विधेयक अब मानसून सीजन में बिजली संशोधन विधेयक 2025 के रूप में आ रहा है, जिसके तहत निजी कंपनियों को बिजली की दरें तय करने और निजी कंपनियों को आपूर्ति करने का अधिकार दिया जाने वाला है।