आंदोलन से देश-विदेश में बैठे अलगाववादी समर्थकों का उद्देश्य पूरा हुआ है। इसकी आड़ में ऐसे संगठन पंजाब के नौजवानों को भड़का कर सूबे को फिर आतंकवाद की आग में धकेलना चाहते हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी भी अलगाववादियों के हमदर्दों को उकसाकर पंजाब को नया दर्द दे सकती है।
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद सिंह केजरीवाल की भूमिका आंदोलन को खत्म करवाने में नहीं थी। तीनों बड़ी पार्टियां आंदोलन के माध्यम से 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने की जुगाड़ में हैं। आंदोलन का प्रभाव पंजाब की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
पंधेर ने दिल्ली पुलिस के रूट पर जताई थी आपत्ति
किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव एक संदेश में यह कहते हुए सुने गए कि किसानों की ट्रैक्टर रैली पूरी हो चुकी है। नौजवान अब लाल किले से बाहर निकल आएं। आंदोलन हिंसक हुआ तो किसानों की बदनामी होगी। पंधेर ने ही दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ट्रैक्टर रैली के रूट पर आपत्ति जताई थी। लेकिन जब तक पंधेर को यह बात समझ आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।