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कहीं कड़ी शर्तों की भेंट न चढ़ जाए करतारपुर कॉरिडोर, ये शर्तें श्रद्धालुओं के लिए बन रहीं बाधा

Thu, 21 Nov 2019 02:49 AM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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श्री करतारपुर साहिब - फोटो : twitter
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भारत-पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के अनुसार भारत प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए भेज सकता है। कॉरिडोर खुले हुए 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एक दिन भी एक हजार श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए नहीं गए हैं। 

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पाकिस्तान सरकार द्वारा 20 अमेरिकी डॉलर की शर्त लगाई गई है। इसके अलावा पासपोर्ट, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन की भी शर्तें हैं। श्रद्धालुओं को पुलिस वेरिफिकेशन करवाने के लिए थानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अब डर है कि कहीं कॉरिडोर भी पंज-आब बस सेवा की तरह फ्लॉप न हो जाए।

2005 में अमृतसर-श्री ननकाना साहिब वाया लाहौर के बीच शुरू हुई पंज-आब बस में जाने के लिए भी कड़ी शर्तें थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस बस सेवा का उद्घाटन किया था। बस शुरू करने का मुख्य उद्देश्य था कि भारत के सिख श्रद्धालु श्री ननकाना साहिब के दर्शन कर सकें और पंजाब के व्यापारी लाहौर आसानी से आ जा सकें।

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इस बस के लिए श्रद्धालुओं और व्यापारियों को वीजा के लिए दिल्ली जाना पड़ता था। साथ ही पुलिस वेरिफिकेशन की शर्त भी थी। 14 साल से इस बस सेवा के संचालन में केंद्र सरकार प्रति वर्ष करोड़ों का घाटा उठा रही थी। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध टूट जाने के बाद से यह बस सेवा बीते आठ महीने से बंद है। 

करतारपुर कॉरिडोर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंजाब सरकार थानों में पुलिस वेरिफिकेशन के लिए अलग से प्रबंध नहीं कर सकी, जिस कारण इसके लिए कई दिन का समय लग रहा है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की समस्या को दूर करने के लिए एसजीपीसी ने अभी सभी गुरुद्वारा साहिबान के प्रबंधकों को श्रद्धालुओं की मदद करने के निर्देश दिए हैं। कई सिख संगठनों ने भी इस संदर्भ में श्रद्धालुओं की मदद की घोषणा की है।

श्रद्धालुओं में पहली बार पाकिस्तान की यात्रा करने के बाद दूसरे देशों की यात्रा में आने वाली संभावित दिक्कतों का भी डर है। इसका कारण यह है कि एसजीपीसी और अन्य संगठन इस बात का प्रचार नहीं कर सके हैं कि पाकिस्तान सरकार सीमा में प्रवेश करते समय पासपोर्ट पर कोई भी मोहर नहीं लगा रही है। वह यात्रियों का पासपोर्ट अपने पास रख लेती है। 20 डॉलर की फीस जमा करने के बाद दो यात्रा स्लिप यात्रियों को दी जा रही है। 

तारीख    कॉरिडोर से जाने वाले श्रद्धालु
9 नवंबर    562
10 नवंबर    229
11 नवंबर    122
13 नवंबर    279
14 नवंबर    241
15 नवंबर    161
16 नवंबर    402
17 नवंबर    547

किसी भी पहचान पत्र से मिले दर्शन की अनुमति: जत्थेदार हरप्रीत सिंह
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने कहा कि श्री करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। पासपोर्ट को बंद कर किसी भी पहचान पत्र पर सभी को गुरुधाम पर जाने की इजाजत मिलनी चाहिए। भारत-पाकिस्तान की सरकारों को भी इस पर संजीदगी से विचार करना चाहिए। 
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