संदिग्ध रूप से हुई मौत के बाद शव को गाड़ी में रखकर मृतक युवक के परिजनों ने बुधवार को जीटी रोड पर करीब डेढ़ घंटे तक चक्का जाम कर दिया। गुस्साए प्रदर्शनकारी कई बार पुलिस अधिकारियों से भी उलझते नजर आए।
एसपी इनवेस्टीगेशन जगजीत सरोया के आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारियों ने शव जीटी रोड से हटाया प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मौत के संबंध में जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान मृतक रविंदर सिंह की मां दलजीत कौर वासी कोटला मूसा और रविंदर के मौसी के बेटे यादविंदर सिंह ने बताया कि रविंदर सिंह की शादी के बाद उसका अपनी पत्नी से झगड़ा होता रहता था।
कोर्ट ने रविंदर को अपनी पत्नी को खर्च देने का आदेश दिया था। रविंदर कोई काम नही करता था, इसलिए वह खर्च नही दे पाया। इसके बाद कोर्ट के आदेशों पर 16 सितंबर को उसे गुरदासपुर जेल भेज दिया गया।
मां दलजीत कौर ने बताया कि 21 सितंबर को जेल में मुलाकात करने के लिए रवींदर की मौसी मनजीत कौर गई थी। पहले तो जेल अधिकारियों ने उन्हें रविंद्र से मिलने ही नहीं दिया। बाद उन्होंने देखा कि उसके बेटे को व्हील चेयर पर बैठाया था और आंख पर चोट के निशान थे।
बाद में कोर्ट के आदेशों पर जेल प्रशासन ने रविंद्र को अमृतसर के गुरू नानक देव अस्पताल में भेज दिया। वहां उसकी 26 सितंबर को मौत हो गई। दलजीत कौर ने आरोप लगाते हुए बताया कि उसके बेटे के शरीर पर चोटों के निशान थे।
उन्हें शक है कि उसके बेटे की यह हालत जेल अधिकारियों से की पिटाई से हुई है और इसमें उसके लड़के के ससुराल वालों की मिलीभगत है। मां दलजीत कौर ने मामले की जांच करके आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में बटाला के एसपी एनवेस्टीगेशन जगजीत सिंह सरोया ने बताया कि कस्टडी में मौत होने पर धारा 176 के तहत कार्रवाई मजिस्ट्रेट की ओर से होती है और उसमें पुलिस को कोई भूमिका नही होती।
उन्होंने बताया कि मृतक लड़के के पारिवारिक सदस्यों को उन्होंने इस बात को लेकर समझाया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें पूरा इंसाफ मिलेगा। इस मामले में जुडीशियल जांच होगी और जो कोई आरोपी पाया गया उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।