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एसजीपीसी के पूर्व विवादित मुख्य सचिव हरचरण सिंह का देहांत

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मात्र दो वर्ष से कम समय तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सचिव रहे हरचरण सिंह (75) का शनिवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके भतीजे के अनुसार हरचरण सिंह को हल्का दिल का दौरा पड़ा लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नियुक्ति से लेकर पदमुक्ति तक विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। गुरुद्वारा रामसर साहिब में मई 2016 का अग्निकांड उनके कार्यकाल में हुआ था। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा इसी गुरुद्वारा साहिब परिसर में स्थित गोल्डन प्रेस से लापता हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों की जांच के लिए गठित कमेटी ने हरचरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। पांच सिंह साहिबान ने जांच रिपोर्ट के आधार पर हरचरण सिंह को श्री अकाल तख्त पर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए थे। उन पर आरोप था कि उन्हें पावन स्वरूपों के अग्नि भेंट होने पर पश्चाताप नहीं किया था। वह अपना स्पष्टीकरण देते, इससे पहले ही उनका देहांत हो गया।
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27 अगस्त 2015 को एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने पूर्व बैंकर हरचरण सिंह को कमेटी के वित्तीय मामलों को देखने के लिए मुख्य सचिव नियुक्त किया था। इससे पहले अनुभवी अकाली नेता मंजीत सिंह कलकत्ता के लिए यह पद पहली बार 2003 में बनाया गया था। कलकत्ता के पद त्याग देने के 12 वर्ष बाद हरचरण सिंह की नियुक्ति इस पद पर हुई थी। मुख्य सचिव के पद के लिए आवेदन करने से पहले हरचरण सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब से पंज प्यारों से अमृत छका था। हरचरण सिंह की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए हुई थी। वह एसजीपीसी के पहले ऐसे मुख्य सचिव थे, जिनको तीन लाख रुपये प्रति महीने, कार और अन्य भत्तों के साथ-साथ रंजीत एवेन्यू में एक कोठी रहने के लिए दी गई थी। उनकी कोठी में एसजीपीसी के कई कर्मचारी भी नियुक्त किए गए थे। वहीं सिख संगठनों ने तीन लाख महीने की राशि गुरुघर की गोलक से एक कर्मचारी पर खर्च करने का खूब विरोध किया था। सिख सद्भावना दल एसजीपीसी के मुख्य दफ्तर में स्थित मीटिंग हॉल के बाहर प्रदर्शन भी किया था। कुछ सिंह संगठनों ने उनकी नियुक्ति को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। हरचरण सिंह एसजीपीसी के पहले ऐसे मुख्य सचिव थे, जिनको नियुक्ति पत्र तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने हाथों से सौंपा था। उनके पदभार ग्रहण करने के दौरान भी जत्थेदार मक्कड़ मौजूद थे।
2017 में जब जत्थेदार किरपाल सिंह बडूंगर ने एसजीपीसी अध्यक्ष पद संभाला तब उनके और हरचरण सिंह के बीच वैचारिक मतभेद उभरने शुरू हो गए। हरचरण सिंह पर आरोप था कि वह एसजीपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच की सांझ को तोड़ रहे हैं। बडूंगर ने 27 जुलाई 2017 को हरचरण सिंह से इस्तीफा ले लिया था। तब हरचरण सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है जबकि सच्चाई यह थी कि एसजीपीसी कार्यकारिणी ने उन पर इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला था।
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जूते पहन कर सेवा का लगाया था टक
श्री हरमंदिर साहिब परिसर स्थित श्री गुरु रामदास लंगर भवन में भट्ठियों के निर्माण के लिए शुरू की जाने वाली सेवा का टक लगाते समय हरचरण सिंह ने जूते पहने हुए थे। इस धार्मिक भूल के कारण उन्हें काफी आलोचना सहन करनी पड़ी थी। इससे पहले हरचरण सिंह ने श्री हरमंदिर साहिब की पवित्र परिक्रमा में स्नान पर पाबंदी लगाने का फरमान जारी कर दिया था। उनका कहना था कि इससे पानी व्यर्थ होता है। इसका भी काफी विरोध पैदा हुआ था। हरचरण सिंह ने ऑपरेशन ब्लूस्टार के कार्यक्रम की कवरेज करने पर मीडिया पर पाबंदी लगा दी थी। हालांकि विरोध के बाद उन्होंने यह फरमान वापस ले लिया था। हरचरण सिंह ने अपने सेवाकाल के दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की वर्तमान स्थिति पर एक किताब भी लिखी थी। पुस्तक का विमोचन अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींढसा की उपस्थिति में फरवरी में चंडीगढ़ में किया गया था।
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