अजनाला के कुएं में से निकाली गई 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह के 282 हिंदुस्तानी सैनिकों की अस्थियों का अंतिम संस्कार अजनाला में एक अगस्त को किया जाएगा।
यह जानकारी पंजाब सरकार द्वारा शहीदी कुआं स्मारक और अस्थियों के रख-रखाव को लेकर बनाई गई सलाहकार कमेटी के सदस्य एवं शोधकर्ता सुरेंद्र कोछड़ ने कल्चरल, पुरातत्व तथा म्यूजियम विभाग पंजाब के डायरेक्टर नवजोत पी. सिंह रंधावा को मेमोरेंडम के रूप में दी।
मांग पत्र में कोछड़ ने बताया कि कुएं से निकाली गई हिंदुस्तानी सैनिकों की बहुत सी अस्थियों को जांच के लिए चंडीगढ़ ले जाने से पहले फोरेंसिक साइंस और डीएनए माहिरों ने नकारा घोषित कर दिया था। उन्होंने बताया कि नकारा घोषित की गई अस्थियां मरम्मत करके अजायब-घर में नहीं रखी जा सकती, इसलिए इनका अजनाला में एक अगस्त को अंतिम संस्कार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए देश-विदेश की सामाजिक, धार्मिक, शिक्षण संस्थाओं, भारतीय सेना और देश के प्रमुख राजनीतिज्ञों सहित प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भेजे जा रहे हैं।
कोछड़ ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पंजाब सरकार भारतीय गृह मंत्रालय की मार्फत ब्रिटेन सरकार से उक्त शहीदों ने नामों सहित शेष जानकारी दो सप्ताह में मंगवाए। साथ ही सैनिकों की अस्थियों का संस्कार सम्मान-पूर्वक ढंग से करने के लिए अजनाला में तुरंत उचित जगह उपलब्ध कराई जाए।
कोछड़ के अनुसार शहीद हिंदुस्तानी सैनिकों की पहचान के संबंध में जानकारी और संस्कार के लिए उचित जगह मिलने के बाद ही उनका पूर्ण धार्मिक विधि से संस्कार किया जाना संभव है।
कोछड़ के दिए मांग-पत्र को गंभीरता से लेते हुए डायरेक्टर रंधावा ने अस्थियों की जांच करने वाले माहिरों को जल्दी जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया है कि संबंधित विभागों के प्रमुख अधिकारी दो-चार दिन में अजनाला पहुंचकर हिंदुस्तानी सैनिकों के संस्कार और स्मारक के निर्माण के संबंध में युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू करेंगे।
सैनिकों की स्मृति में स्मारक निर्माण के संबंध में कोछड़ ने कहा कि अजनाला में हिंदुस्तानी सैनिकों की याद में स्मारक निर्माण का फैसला पंजाब और केंद्र सरकार की इच्छा और देशवासियों की मांग पर निर्भर करता है।